उत्तर प्रदेश के उस नक्शे को देखिए जहाँ सोनभद्र की सीमाएं झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और बिहार को छूती हैं—वहाँ की ‘दुद्धी’ विधानसभा सीट पर एक ऐसा नाम था, जिसे हराना नामुमकिन सा लगता था। 8 बार के विधायक, आदिवासियों के मसीहा और समाजवादी पार्टी के दिग्गज विजय सिंह गोंड अब हमारे बीच नहीं रहे। जब राजनीति में हवाएं बदलती थीं, सरकारें गिरती-बनती थीं, तब भी यूपी की इस आखिरी सीट पर विजय सिंह गोंड का किला अभेद्य रहता था।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। दुद्धी (सोनभद्र) विधानसभा सीट से अजेय योद्धा माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक विजय सिंह गोंड (Vijay Singh Gond) का निधन (Demise) हो गया है। यूपी की भौगोलिक सीमा की ‘आखिरी’ सीट पर 8 बार अपनी जीत का परचम लहराने वाले गोंड का जाना न केवल सपा, बल्कि पूरे पूर्वांचल की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है।
अखिलेश यादव ने जताया शोक
विजय सिंह गोंड के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक जताया है। निधन की जानकारी मिलते ही अखिलेश यादव पीजीआई पहुंचे। उन्होंने कहा कि विनय गोंड हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने हमेशा से ही आदिवासियों की सेवा की। जनता भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। इसलिए उन्हें हर बार सेवा का मौका दिया था।

विजय सिंह गोंड को ‘पितामह’ की दी जाती है संज्ञा
आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करने वाले अग्रणी नेताओं में शुमार विजय सिंह गोंड के निधन से सोनभद्र सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर है। दुद्धी विधानसभा सीट को आदिवासी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां विजय सिंह गोंड को ‘पितामह’ की संज्ञा दी जाती रही है। उत्तर प्रदेश की 403वीं और अंतिम विधानसभा सीट दुद्धी जनजाति के लिए आरक्षित है और इस सीट पर उनका लंबे समय तक वर्चस्व रहा।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सोनभद्र की दुद्धी (ST) सीट से वर्तमान विधायक विजय सिंह गोंड का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

- 8 बार की ऐतिहासिक जीत: विजय सिंह गोंड का राजनीतिक कद इस बात से समझा जा सकता है कि वे 1980 में पहली बार निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस, जनता दल और फिर लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और कुल 8 बार विधायक निर्वाचित हुए।
- यूपी की आखिरी विधानसभा सीट: दुद्धी सीट उत्तर प्रदेश की भौगोलिक दृष्टि से सबसे अंतिम सीट मानी जाती है। यहाँ के आदिवासियों और स्थानीय लोगों के बीच विजय सिंह की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उन्हें क्षेत्र में ‘विकास पुरुष’ के तौर पर देखा जाता था।
- सियासी सफर: विजय सिंह गोंड उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सोनभद्र जैसे सुदूर अंचल में समाजवादी पार्टी के झंडे को बुलंद रखा। 2024 के उपचुनावों और उसके बाद के घटनाक्रमों में भी उनकी सक्रियता बनी रही थी।









