राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- ‘व्यवस्था थोपकर छात्रों की आवाज दबा रही सरकार’ JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ ABVP का देशव्यापी प्रदर्शन, CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग ‘मैं दलित हूं…’, हल्द्वानी में खड़गे के मंच के ‘शुद्धीकरण’ पर राज्यसभा में संग्राम; नड्डा ने जांच का दिया भरोसा 80th Independence Day: लाल किले पर 80वें स्वतंत्रता दिवस की भव्य फुल ड्रेस रिहर्सल, तीनों सेनाओं ने किया शक्ति प्रदर्शन CBSE 12वीं सप्लीमेंट्री रिजल्ट 2026 जारी, 53.08% कंपार्टमेंट छात्रों ने मारी बाजी; DigiLocker पर चेक करें स्कोरकार्ड AI2379 में 300 फीट नीचे गिरा विमान, 17 घायल; एक मिनट में तीन हाइड्रोलिक अलर्ट के बाद ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट
राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- ‘व्यवस्था थोपकर छात्रों की आवाज दबा रही सरकार’ JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ ABVP का देशव्यापी प्रदर्शन, CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग ‘मैं दलित हूं…’, हल्द्वानी में खड़गे के मंच के ‘शुद्धीकरण’ पर राज्यसभा में संग्राम; नड्डा ने जांच का दिया भरोसा 80th Independence Day: लाल किले पर 80वें स्वतंत्रता दिवस की भव्य फुल ड्रेस रिहर्सल, तीनों सेनाओं ने किया शक्ति प्रदर्शन CBSE 12वीं सप्लीमेंट्री रिजल्ट 2026 जारी, 53.08% कंपार्टमेंट छात्रों ने मारी बाजी; DigiLocker पर चेक करें स्कोरकार्ड AI2379 में 300 फीट नीचे गिरा विमान, 17 घायल; एक मिनट में तीन हाइड्रोलिक अलर्ट के बाद ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट

सिर्फ एक कॉल और हो जाती डील!’ पीएम मोदी ने क्यों नहीं किया ट्रंप को फोन? अमेरिका का बड़ा खुलासा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया है कि एक बड़ी ट्रेड डील सिर्फ इसलिए अधूरी रह गई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वह आखिरी ‘कन्फर्मेशन कॉल’ नहीं की।

क्या भारत और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर की ट्रेड डील महज एक फोन कॉल की भेंट चढ़ गई? वाशिंगटन से आए एक सनसनीखेज दावे ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक का कहना है कि भारत के साथ व्यापारिक समझौते की पूरी बिसात बिछ चुकी थी, फाइलें तैयार थीं, लेकिन आखिरी मौके पर ‘ईगो’ या ‘असहजता’ आड़े आ गई। लटनिक के मुताबिक, पीएम मोदी को बस एक कॉल कर के डील फाइनल करनी थी, लेकिन वह कॉल कभी आई ही नहीं। अब सवाल यह है कि क्या यह भारत की कोई सोची-समझी रणनीति थी या ट्रंप के साथ मोलभाव का नया दौर?

अमेरिकी वाणिज्य सचिव का बयान आया सामने

अमेरिकी वाणिज्य सचिव के इस बयान से आधिकारिक तौर पर सामने आ गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के खिलाफ टैरिफ को लेकर सख्त बयानबाजी व्यापार या नीतियों को लेकर नहीं कर रहे बल्कि यह उनके अहंकार से जुड़ा है जिसे ठेस लग गई है।

पीएम मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया और फिर ट्रंप का ईगो हर्ट हो गया. इसकी कीमत भारत को 50 प्रतिशत तक के भारी-भरकम टैरिफ के रूप में चुकानी पड़ी. ट्रंप अब भारत के खिलाफ और अधिक टैरिफ बढ़ाने की बात भी कह ही चुके हैं।

लटनिक ने यह भी कहा कि जिन शर्तों पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग तय माना जा रहा था, वे अब लागू नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका उस व्यापार समझौते से पीछे हट चुका है, जिस पर पहले सहमति बनी थी। अब हम उस पर विचार नहीं कर रहे हैं।‘

अमेरिका की बातों की सच्चाई

जुलाई 2025 में अमेरिका की यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, जापान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और दक्षिण कोरिया के साथ टैरिफ को लेकर चर्चा चल रही थी। हॉवर्ड लटनिक की बातों पर गौर करें, तो जिन देशों ने अमेरिका के साथ जल्दी ही बातचीत समाप्त करने पर सहमति जताई, उनके ऊपर कम टैरिफ लगाया गया। लेकिन देखा जाए तो उस महीने हुए टैरिफ समझौतों का क्रम और संबंधित दरें लटनिक के दावों से मेल नहीं खातीं।

लटनिक ने अपनी बातों में वियतनाम का नाम भी लिया। वियतनाम काफी समये पहले ही अमेरिका के साथ बातचीत समाप्त कर चुका है, लेकिन अभी भी निर्यात पर अमेरिका को उच्चतम टैरिफ दर का भुगतान कर रहा है। वियतनाम पर 2 जुलाई से ही 20 फीसदी टैरिफ लगा है, जो कि अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है।

भारत का रुख

भारत सरकार की ओर से अभी तक लटनिक के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि भारत किसी भी दबाव में आकर ‘लीडर लेवल’ की कॉल करने के बजाय अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को प्राथमिकता दे रहा है। ट्रंप प्रशासन का यह रवैया दिखाता है कि आने वाले दिनों में भारत के लिए अमेरिकी बाजार में राह आसान नहीं होने वाली है।

Comments are closed.

और पढ़ें