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Mamta Vs ED: कोलकाता की आग, दिल्ली में बवाल: ममता बनर्जी का ED पर ‘डेटा चोरी’ का गंभीर आरोप, हिरासत में TMC सांसद!

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पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार के बीच जारी टकराव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के विरोध में कोलकाता से शुरू हुआ प्रदर्शन अब देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों तक फैल चुका है। जहाँ एक तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों को हिरासत में लिया गया है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED पर सीधे ‘चोरी’ का आरोप लगाकर संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा कर दी है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ (Political Vendetta) करार दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा की ED की रेड भ्रष्टाचार के लिए नहीं, बल्कि जासूसी के लिए है। ये लोग हमारी पार्टी का आंतरिक डेटा और आगामी चुनावों की गुप्त रणनीति चुराने की कोशिश कर रहे हैं।”

ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए ED के खिलाफ FIR दर्ज करवा दी है, जो भारतीय राजनीति में अपनी तरह का एक दुर्लभ कदम माना जा रहा है।

जांच एजेंसी ED ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की। ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बंगाल पुलिस जांच में बाधा डाल रही है और ED अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है। और एजेंसी ने अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मामले में ED की स्थिति फिलहाल मजबूत मानी जा रही है. जानकारों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय को PMLA की धारा 67 के तहत व्यापक अधिकार मिले हुए हैं, जिसके तहत जांच के दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जा सकते हैं. जब तक राज्य पुलिस यह साबित नहीं कर देती कि ED अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए कार्रवाई की या जानबूझकर कानून का उल्लंघन किया, तब तक उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई टिक पाना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रणव सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री होने के नाते ममता बनर्जी को जांच से कोई संवैधानिक छूट या इम्युनिटी नहीं मिलती. संविधान मंत्रियों को सदन के भीतर विशेषाधिकार देता है, लेकिन कानून के सामने सभी समान हैं. उन्होंने कहा कि यदि ED यह साबित कर दे कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डालते हुए अहम सबूत हटाए हैं, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मामलों को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।

फिलहाल देखा जाए तो यह विवाद केवल जांच तक सीमित नहीं है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ‘शक्ति प्रदर्शन’ का मैदान बन गया है। ममता बनर्जी का ‘डेटा चोरी’ वाला आरोप सीधे तौर पर केंद्र सरकार की विश्वसनीयता पर हमला है, जबकि ED का कोर्ट जाना यह दर्शाता है कि एजेंसी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

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