उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्री दफ्तरों में अब नोटों की गड्डियां गिनने वाली मशीनें खामोश हो जाएंगी। योगी सरकार ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ एक और बड़ी ‘डिजिटल स्ट्राइक’ कर दी है। अब जमीन या मकान की रजिस्ट्री के दौरान नकद (Cash) के लेनदेन पर पूरी तरह लगाम कस दी गई है। सालों से रजिस्ट्री दफ्तरों के गलियारों में चलने वाला ‘कैश का खेल’ और अंडर-टेबल (Under Table) डीलिंग अब इतिहास बनने जा रही है। इस फैसले से न केवल काले धन पर करारा प्रहार होगा, बल्कि आम जनता को बिचौलियों और धोखेबाजी से भी निजात मिलेगी। यूपी अब पारदर्शिता के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहाँ हर पाई का हिसाब बैंक के जरिए होगा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आज से एक ऐतिहासिक बदलाव लागू कर दिया है। पूरे प्रदेश में संपत्ति की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह बदलने जा रही है। अब 20,000 रुपये से अधिक की रजिस्ट्री फीस के लिए नकद लेनदेन इतिहास की बात हो जाएगी। यह कदम न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि देशहित में उठाया गया एक ऐसा कदम है जो भू-माफियाओं और बिचौलियों के गठजोड़ को जड़ से उखाड़ फेंकने की ताकत रखता है।

फिलहाल इस नए नियम के प्रभावी होने से आम जनता और राज्य की अर्थव्यवस्था को कई बड़े लाभ होंगे, जैसे कि रजिस्ट्री दफ्तरों में अक्सर नकद लेनदेन के बहाने ‘ऊपरी कमाई’ और काले धन के खपाए जाने की शिकायतें आती थीं। ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य होने से अब पाई-पाई का हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगा। इससे पारदर्शिता (Transparency) आएगी और भ्रष्टाचार के रास्ते बंद होंगे। और नकद लेनदेन पर रोक लगने से उन बिचौलियों का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा जो नकद भुगतान में हेराफेरी कर आम जनता को ठगते थे। अब पोर्टल के माध्यम से सीधा भुगतान होने से जनता का पैसा सीधे सरकारी खजाने में जाएगा, जिसका उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं में होगा।
देखा जाए तो इस कदम से राज्य के राजस्व (Revenue) में भी वृद्धि होगी। जब हर ट्रांजैक्शन डिजिटल होगा, तो टैक्स चोरी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। यह पैसा प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण में काम आएगा, जो अंततः राष्ट्र निर्माण (Nation Building) में सहायक होगा। फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ‘ई-गवर्नेंस’ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह नियम न केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि एक ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था की नींव रखेगा। आज से यूपी की रजिस्ट्री चौखटों पर ईमानदारी का नया पहरा शुरू हो गया है।

यह फैसला केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आम नागरिक के हक की लड़ाई है। यूपी में रजिस्ट्री प्रक्रिया का यह ‘कायाकल्प’ मध्यम वर्ग को उन भू-माफियाओं से बचाएगा जो कैश के चक्कर में लोगों को चूना लगाते थे। जब लेनदेन पारदर्शी होगा, तो निवेश बढ़ेगा और यूपी की इकोनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने का सपना भी तेजी से पूरा होगा। सरकार की यह डिजिटल क्रांति भ्रष्टाचार की जड़ें खोदने में मील का पत्थर साबित होगी।









