सालों की मेहनत, लाखों का कर्ज और आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने—आज ये सब एक झटके में बिखरते नजर आ रहे हैं। अमेरिका के नए प्रशासन द्वारा अपनाई गई कठोर वीजा नीतियों ने भारतीय समुदाय के भीतर डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले एक साल के भीतर जिस बड़े पैमाने पर वीजा रद्दीकरण (Visa Cancellations) की खबरें आ रही हैं, उसने न केवल हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है, बल्कि भारत सरकार के लिए भी एक बड़ी चिंता खड़ी कर दी है।

आपको बता दें कि, सबसे ज्यादा मार उन होनहार भारतीय छात्रों पर पड़ी है जो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे। पिछले 12 महीनों में रिकॉर्ड संख्या में F-1 छात्र वीजा रद्द किए गए हैं। छोटी-सी तकनीकी चूक या नियमों में अचानक आए बदलावों के कारण छात्रों को डिपोर्ट (निर्वासित) होने की धमकियां मिल रही हैं। कई छात्र अपनी डिग्री पूरी करने के आखिरी दौर में थे, लेकिन वीजा रद्द होने से उनका करियर और निवेश दोनों दांव पर लग गए हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि, केवल छात्र ही नहीं, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देने वाले भारतीय आईटी पेशेवर भी अब सुरक्षित नहीं हैं। नए प्रशासन ने H-1B वीजा के नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रियाओं को इतना जटिल बना दिया है कि कुशल पेशेवरों के वीजा भी धड़ल्ले से रद्द किए जा रहे हैं। कई प्रवासी भारतीयों को डर है कि उन्हें रातों-रात अपना घर-बार छोड़कर भारत वापस आना पड़ सकता है, जिससे उनके बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

दिल्ली से लेकर हैदराबाद और बेंगलुरु तक, हजारों माता-पिता अपनी संतानों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सोशल मीडिया पर #VisaCrisis और #IndianStudentsInUS जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब अमेरिका भारतीयों के लिए सुरक्षित और स्वागत योग्य नहीं रहा?
यह संकट का समय है। आने वाले हफ्तों में अगर अमेरिका ने अपनी नीतियों में नरमी नहीं दिखाई, तो हजारों भारतीयों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।









