महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब नगर निगम चुनावों (BMC सहित 29 नगर निगम) के मतदान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thakre) ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने चुनावी स्याही (Election Ink) के आसानी से मिट जाने को लेकर केंद्र और राज्य चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है।
“वोट डालिए, बाहर निकलिए, सैनिटाइजर से स्याही पोंछिए और फिर से अंदर जाकर वोट डाल दीजिए!” – महाराष्ट्र की राजनीति के दो धुर विरोधी भाई, उद्धव और राज ठाकरे, आज एक सुर में चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्याही लगी उंगली दिखाते हुए गरजते हुए कहा कि यह सिर्फ खराब क्वालिटी की स्याही का मामला नहीं है, बल्कि “लोकतंत्र की हत्या” करने का एक सुनियोजित प्रयास है। जब स्याही ही मिट जाए, तो निष्पक्ष चुनाव का दावा कैसा?

महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों (जिनमें देश की सबसे अमीर महानगर पालिका BMC भी शामिल है) के लिए मतदान हो रहा है। इसी बीच ‘स्याही विवाद’ ने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु:
- स्याही नहीं, धोखा है: उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि इस बार मतदान केंद्रों पर ‘इंडेलिबल इंक’ (अमिट स्याही) की जगह घटिया क्वालिटी के मार्कर पेन का इस्तेमाल हो रहा है, जिसकी स्याही सैनिटाइजर या नेल पॉलिश रिमूवर से तुरंत मिट रही है।
- लोकतंत्र पर हमला: उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “यह उंगली की स्याही नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और लोकतंत्र को मिटाने का प्रयास है। अगर स्याही मिट जाएगी, तो फर्जी वोटिंग (Bogus Voting) को कौन रोकेगा?”
- चुनाव आयोग को अल्टीमेटम: उद्धव ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, तो वे आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
- ठाकरे बंधुओं की एकजुटता: दिलचस्प बात यह है कि करीब 20 साल बाद एक साथ आए उद्धव और राज ठाकरे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। राज ठाकरे ने भी अपनी उंगली दिखाते हुए दावा किया कि स्याही आसानी से साफ हो रही है।

सरकार और चुनाव आयोग का जवाब
- देवेंद्र फडणवीस का पलटवार: मुख्यमंत्री फडणवीस ने इन आरोपों को “हार की हताशा” करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हार के डर से बहाने ढूंढ रहा है।
- चुनाव आयोग की सफाई: राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने स्पष्ट किया कि 2011-12 से ही स्थानीय निकाय चुनावों में मार्कर पेन का उपयोग हो रहा है और यह वही स्याही है जो केंद्रीय चुनाव आयोग उपयोग करता है। आयोग ने यह भी कहा कि स्याही मिटाने की कोशिश करना एक दंडनीय अपराध है।

महाराष्ट्र के इस ‘मिनी विधानसभा चुनाव’ कहे जाने वाले निकाय चुनाव में स्याही का यह विवाद केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। कल, 16 जनवरी 2026 को जब नतीजे आएंगे, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘स्याही कांड’ के इन आरोपों का असर जनादेश पर पड़ता है या नहीं। फिलहाल, उद्धव ठाकरे के इस कड़े रुख ने चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।









