Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज की सुबह सामान्य नहीं है। समाजवादी पार्टी के मुख्यालय के बाहर उमड़ी भीड़ और सुरक्षा के कड़े इंतजाम चीख-चीख कर कह रहे हैं कि अखिलेश यादव ने कुछ बड़ा प्लान कर लिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख द्वारा बुलाई गई ‘आपातकालीन बैठक’ ने न केवल राजनैतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि यूपी सरकार के खेमे में भी बेचैनी की लहर दौड़ गई है।
Lucknow: बंद कमरे में हाई-प्रोफाइल मीटिंग
आज अखिलेश यादव अपने सभी सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों (छाया मंत्रियों) के साथ बंद कमरे में एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यह बैठक महज चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ‘मिशन यूपी’ के उस रोडमैप को अंतिम रूप देने के लिए है, जो आने वाले समय में मौजूदा सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित होने वाला है।
यूपी सरकार के सुशासन के दावों को चुनौती
अब अखिलेश यादव रक्षात्मक नहीं, बल्कि सीधे आक्रमण की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस मास्टर प्लान में बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर सरकार को सड़क से लेकर सदन तक घेरने की तैयारी है। फिलहाल अखिलेश यादव की यह ‘आपात’ सक्रियता सीधे तौर पर यूपी सरकार के ‘सुशासन’ के दावों को चुनौती देने की तैयारी है। आज लखनऊ (Lucknow) के इस वॉर रूम से जो चिंगारी निकलेगी, वह आने वाले चुनाव तक आग का रूप ले सकती है।

क्या निकलेगा इस बैठक से नया जन-आंदोलन?
अखिलेश यादव जिस तरह से अपने सांसदों और मंत्रियों के साथ मोर्चाबंदी कर रहे हैं, उससे साफ है कि उन्होंने सत्ता के सिंहासन को हिलाने के लिए ‘चक्रव्यूह’ तैयार कर लिया है। इस आपातकालीन बैठक से यह अनुमान तो लगाया जा सकता है कि, आने वाले दिनों में यूपी की सड़कों पर आप बड़े जन-आंदोलनों को देख सकतें है। विपक्षी खेमे की इस हलचल को देखते हुए खुफिया विभाग और प्रशासनिक अमला भी सतर्क हो गया है। ऐसा माना जा रहा है कि अखिलेश का यह आक्रामक रुख अन्य विपक्षी दलों को भी उनके नेतृत्व में आने को मजबूर कर सकता है। (Lucknow)
आपको बता दें, आज की यह बैठक केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि यूपी की सत्ता के लिए एक चेतावनी है। अखिलेश यादव के इस ‘रोडमैप’ ने यह साफ कर दिया है कि अब लड़ाई आर-पार की होगी। जैसे-जैसे लखनऊ (Lucknow) की इस बैठक से खबरें छनकर बाहर आएंगी, यूपी सरकार की मुश्किलें और बढ़ना तय माना जा रहा है।









