Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की सियासत में आज उस वक्त ‘भूकंप’ आ गया, जब बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और राजनीति की ‘चाणक्य देवी’ कही जाने वाली मायावती ने अचानक लखनऊ में राज्य स्तरीय महा-बैठक बुला ली। यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि सत्ता की कुर्सी को हिला देने वाला वो ‘मास्टर स्ट्रोक’ है, जिसकी आहट मात्र से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
Uttar Pradesh: मायावती की महा-बैठक या सत्ता परिवर्तन का शंखनाद?
यूपी की राजनीति का इतिहास गवाह है—जब-जब ‘बहन जी’ खामोश रही हैं, तब-तब उन्होंने किसी बड़े तूफान की पटकथा लिखी है। आज लखनऊ में उमड़ा नीला सैलाब इस बात की तस्दीक कर रहा है कि बसपा ने अपनी कमर कस ली है। उधर, मैदान में अखिलेश यादव पहले ही मोर्चे पर डटे हैं, और इधर मायावती की इस सक्रियता ने बीजेपी के लिए चौतरफा घेराबंदी तैयार कर दी है। अब सवाल यह नहीं कि चुनाव कब होंगे, सवाल यह है कि क्या बीजेपी इस दोहरी मार को झेल पाएगी?
जब बात दबे-कुचले, शोषित और निचले स्तर के समाज की आती है, तो ‘बहन’ का मोर्चा संभालना तय माना जाता है। इस बैठक का एजेंडा साफ है—जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को ‘करो या मरो’ के मिशन पर भेजना। जानकारों का मानना है कि मायावती की यह रणनीति आगामी चुनाव में ‘खेला’ पलटने के लिए काफी है। (Uttar Pradesh)

अखिलेश का मोर्चा और मायावती की सक्रियता
अब यह खबर उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है। अब तक निश्चिंत बैठी सत्ता के लिए यह ‘वेक-अप कॉल’ है। चुनावी रणनीतिकारों का कहना है कि अगर मायावती और अखिलेश ने अपने-अपने किलों को मजबूत कर लिया, तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है। (Uttar Pradesh)
फिलहाल, यूपी की जनता अब सांसें रोककर देख रही है कि ‘बहन जी’ के पिटारे से कौन सा चुनावी मंत्र निकलने वाला है। क्या यह बैठक बीजेपी के अभेद्य दुर्ग में सेंध लगाने की आखिरी कील साबित होगी? लखनऊ की सड़कों पर छाई यह बेचैनी बता रही है कि आने वाला वक्त यूपी की राजनीति के लिए सबसे बड़ा उलटफेर लेकर आने वाला है।









