General Naravane Book Controversy: आज की सबसे बड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा को हिला देने वाली खबर। जहां पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर एक ऐसा ‘अपराधिक कांड’ सामने आया है, जिसने देश के सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर किसके इशारे पर देश के सबसे संवेदनशील राज सड़कों पर आ गए?
General Naravane Book Controversy: ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ की उड़ी धज्जियाँ
आपको बता दें कि, इस किताब में लद्दाख के गलवान में हुए उस खूनी संघर्ष और चीन के साथ जारी गतिरोध के वो विवरण दर्ज हैं, जिन्हें रक्षा मंत्रालय ने अभी तक ‘क्लीयरेंस’ नहीं दिया है। ऐसे में जब किताब की मंज़ूरी लंबित थी, तो इसे ऑनलाइन लीक करना महज़ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराधिक सोंच को दर्शाता है। और बिना रक्षा मंत्रालय की अनुमति के देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करना सीधे तौर पर ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ की धज्जियाँ उड़ाना है।
जैसे ही किताब के कुछ हिस्से लीक हुए, विपक्षी खेमे ने इसे लपक लिया है। और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। और अब विपक्ष का सरकार से सीधा सवाल है कि, ”अगर सेना प्रमुख ने कुछ लिखा है, तो सरकार उसे दबाने की कोशिश क्यों कर रही है? क्या गलवान में कुछ ऐसा हुआ था जिसे देश से छिपाया जा रहा है? सच को सामने आने से क्यों रोका जा रहा है?” (General Naravane Book Controversy)
दिल्ली पुलिस की रडार पर ‘ब्लैक शीप’
दिल्ली पुलिस अब उस ‘ब्लैक शीप’ की तलाश में है जिसने इस पांडुलिपि को लीक किया। क्या यह किसी पब्लिशिंग हाउस की लापरवाही है या फिर भारत की सुरक्षा रणनीतियों को दुनिया के सामने नंगा करने की कोई अंतरराष्ट्रीय साजिश?
आपको बता दें, एक पूर्व सेना प्रमुख की यादें केवल एक ‘किताब’ नहीं होतीं, वो देश की सुरक्षा का ‘दस्तावेज़’ होती हैं। कानून को ताक पर रखकर इसे सार्वजनिक करना देशद्रोह की सीमा को छूता है। अब देखना यह है कि दिल्ली पुलिस की जांच में कौन सा ‘बड़ा नाम’ सामने आता है जो देश की गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने का गुनहगार है। (General Naravane Book Controversy)









