West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस SIR प्रक्रिया को लेकर महीनों से ‘ममता बनाम केंद्र’ की जंग छिड़ी थी, आज उसमें एक बड़ा धमाका हो गया है। निर्वाचन आयोग ने बंगाल के 7 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। आरोप है—SIR प्रक्रिया में बड़ी धांधली और जानबूझकर की गई गड़बड़ी।
West Bengal Politics: ममता बनर्जी का ‘चट्टान’ वाला बयान
आपको बता दें कि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुरुआत से ही हुंकार भर रही थीं कि वह बंगाल में SIR को कदम नहीं रखने देंगी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से कई बार इसका विरोध किया हैं, उन्होंने हमेशा कहा है कि,
मैं SIR के सामने चट्टान की तरह खड़ी रहूंगी, बंगाल के लोगों का डेटा और अधिकार छीनने वाली किसी भी व्यवस्था को मैं आने नहीं दूंगी। दीदी पीछे हटने वाली नहीं है!
क्या ममता ने पर्दे के पीछे से खेल खेला?
लेकिन आज जब 7 अधिकारियों पर गाज गिरी, तो राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या दीदी ने पर्दे के पीछे से ‘खेला’ कर दिया है? क्या जानबूझकर प्रक्रिया में गड़बड़ी कराई गई ताकि इस सिस्टम को फेल साबित किया जा सके? (West Bengal Politics)
कार्रवाई होते ही बीजेपी ने मोर्चा खोल दिया है। शुभेंदु अधिकारी और अन्य नेताओं का कहना है कि यह गड़बड़ी महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित ‘खेला’ है। बीजेपी का आरोप है कि ममता सरकार केंद्रीय प्रणालियों में सेंध लगाकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी, जिसे चुनाव आयोग ने पकड़ लिया है।
ममता बनर्जी का संकल्प: “झुकेंगे नहीं, लड़ेंगे!”
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे केंद्र की तानाशाही बताया है। पार्टी का कहना है कि अधिकारियों को डराने और बंगाल के प्रशासनिक ढांचे को अस्थिर करने के लिए निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल किया जा रहा है। दीदी अभी भी अपने स्टैंड पर कायम हैं—”झुकेंगे नहीं, लड़ेंगे!” (West Bengal Politics)









