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यूपी का सियासी बाजार! AIMIM का ‘प्रोडक्ट’ बेचने निकले ओवैसी, पर ग्राहक मिलने को तैयार नहीं!

Asaduddin Owaisi

Asaduddin Owaisi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट अभी दूर है, लेकिन सियासी गलियारों में ‘नुमाइश’ शुरू हो चुकी है। इस बाजार में सबसे ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं हैदराबाद के ‘सेल्समैन’ असदुद्दीन ओवैसी। वे अपनी पार्टी का ‘पॉलिटिकल प्रोडक्ट’ लेकर यूपी के हर बड़े सियासी दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन विडंबना देखिए—मानो हर दरवाजे पर ‘No Salesmen Allowed’ की तख्ती लगी हो।

Asaduddin Owaisi: वाकपटुता का रैपर और वोट बैंक की हकीकत

ओवैसी साहब अपने वाकपटुता के रैपर में लपेटकर अपनी पार्टी को एक ‘प्रीमियम ब्रांड’ की तरह पेश कर रहे हैं, लेकिन यूपी के पुराने खिलाड़ी (सपा, बसपा और कांग्रेस) उन्हें ऐसे देख रहे हैं जैसे वह गली-मोहल्ले में नया-नया लॉन्च हुआ कोई ‘लोकल प्रोडक्ट’ हो। आलम यह है कि गठबंधन की ‘डील’ फाइनल होना तो दूर, बातचीत की ‘विंडो शॉपिंग’ तक नहीं हो पा रही है। (Asaduddin Owaisi)

राजनीतिक पंडित तंज कस रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो ओवैसी के ‘प्रोडक्ट’ को लोग ठुकरा रहे हैं? क्या यह प्रोडक्ट केवल ‘चुनावी शोर’ मचाता है या वाकई वोट बैंक की ‘गारंटी’ देता है? यूपी की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या AIMIM केवल ‘वोट कटवा’ टैग के साथ ही मार्केट में घूमती रहेगी या कभी ‘मेनस्ट्रीम ब्रांड’ भी बन पाएगी?

‘वोट कटवा’ का टैग या ‘मेनस्ट्रीम’ बनने की चाह

​हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ बड़े दल कैमरे के सामने ओवैसी के ‘प्रोडक्ट’ को रिजेक्ट (Reject) कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गलियारों में फुसफुसाहट कुछ और ही है। क्या यह सच में ओवैसी की हार है, या फिर यह किसी ‘सीक्रेट डील’ का हिस्सा है? (Asaduddin Owaisi)

आपको बता दें, यूपी की राजनीति का पुराना इतिहास गवाह है कि जो दल दिन के उजाले में एक-दूसरे को ठुकराते हैं, वही अंधेरा होते ही एक-दूसरे के ‘वोट बैंक’ को साधने के लिए हाथ मिला लेते हैं। ​असली सस्पेंस तो यह है कि— क्या ओवैसी वाकई अकेले पड़ गए हैं, या फिर वे किसी ऐसी ‘स्ट्राइक’ की तैयारी में हैं जो ऐन चुनाव के वक्त विपक्षी गठबंधन के गणित को पूरी तरह बिगाड़ देगी? फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन याद रहे… सियासत में सन्नाटा अक्सर किसी बड़े तूफान की आहट होता है। (Asaduddin Owaisi)

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