नई दिल्ली/सुल्तानपुर: फरवरी 2026 की यह दोपहर भारतीय राजनीति में एक नई ‘जंग’ की गवाह बन रही है। एक तरफ बीजेपी और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर है, तो दूसरी तरफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों को एक नया नाम दिया है। हाल ही में राहुल गांधी ने बड़ी बेबाकी से कहा कि उनके खिलाफ लंबित 32 मामले (जिसमें हाल ही में एक नया केस जुड़ा है) उनके लिए सजा नहीं, बल्कि “पदक” हैं। उनके अनुसार, ये पदक उनके प्रतिरोध और डटे रहने की निशानी हैं।
सुल्तानपुर कोर्ट में पेशी: 2018 का वो पुराना मामला
राहुल गांधी के इस बयान के पीछे कानूनी लड़ाइयों का एक लंबा इतिहास है। आज उन्हें उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर कोर्ट में पेश होना है। मामला 2018 का है, जब उन्होंने अमित शाह को लेकर एक कथित विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया था। राहुल के समर्थकों का मानना है कि यह विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए कानून का “हथियार” की तरह इस्तेमाल है, जबकि आलोचक इसे उनके ‘विवादित बयानों’ का नतीजा बताते हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ा महासंग्राम
राहुल गांधी के इस “पदक” वाले बयान ने सोशल मीडिया पर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। प्रो-कांग्रेस अकाउंट्स इस वीडियो क्लिप को ‘साहस और निडरता’ के प्रतीक के तौर पर शेयर कर रहे हैं। हालाँकि, इंटरनेट की दुनिया यहाँ भी बंटी हुई है:
- समर्थकों का पक्ष: हिंदी कमेंट्री के साथ राहुल को एक ‘योद्धा’ की तरह पेश किया जा रहा है जो सत्ता के सामने झुकने को तैयार नहीं है।
- आलोचकों का वार: दूसरी तरफ, बीजेपी समर्थकों और आलोचकों ने उन्हें “स्पाइनलेस” (रीढ़हीन) और “कानून का अनादर करने वाला” बताकर उन पर निशाना साधा है।
पदक या राजनीतिक चुनौती?
राहुल गांधी का यह ‘आक्रामक अंदाज’ यह साफ करता है कि वे कानूनी पेचीदगियों को अपनी राजनीतिक मजबूती में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। 2026 के चुनावी माहौल में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये “32 पदक” जनता के बीच राहुल की छवि को एक ‘मजबूत नेता’ के रूप में स्थापित करते हैं या उनके लिए मुश्किलें बढ़ाते हैं।









