लंदन डेस्क: तारीख 20 फरवरी 2026। आज जब हम ब्रिटेन के राजघराने की ओर देखते हैं, तो वह अनुशासन और परंपरा का प्रतीक नजर आता है। लेकिन इसी भव्यता के पीछे एक ऐसा नाम छिपा है जो आधुनिक ब्रिटेन के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी बन चुका है— प्रिंस एंड्रयू। क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के लाडले बेटे और 1982 के फॉकलैंड युद्ध के ‘वॉर हीरो’ रहे प्रिंस एंड्रयू आज इतिहास के पन्नों में एक अपराधी और रसूख के पीछे काले सच छिपाने वाले शख्स के रूप में दर्ज हो चुके हैं। यह कहानी सिर्फ एक राजकुमार के पतन की नहीं, बल्कि सत्ता, न्याय और उस खतरनाक दोस्ती की है जिसने राजशाही के रसूख को मिट्टी में मिला दिया।
एपस्टीन के साथ वो ‘खतरनाक’ दोस्ती
प्रिंस एंड्रयू के पतन की नींव अमेरिकी अरबपति और सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ उनकी दोस्ती ने रखी। एपस्टीन कोई साधारण निवेशक नहीं था, बल्कि एक ऐसा अपराधी था जिसने दुनिया के ताकतवर लोगों को अपने घिनौने नेटवर्क में फंसाया था। 1990 के दशक में शुरू हुई यह दोस्ती 2008 में एपस्टीन के दोषी सिद्ध होने के बाद भी जारी रही। 2011 में जब एंड्रयू न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर पर चार दिनों तक रुके, तो पूरे ब्रिटेन ने सवाल उठाया। राजमहल की “दोस्ती खत्म करने गए थे” वाली सफाई किसी के गले नहीं उतरी। यहीं से वह ‘शाही सुरक्षा कवच’ दरकना शुरू हुआ।
वर्जीनिया गफ्रे के आरोप और वो विवादित तस्वीर
वर्जीनिया गफ्रे ने अदालत में हलफनामा देकर आरोप लगाया कि जब वह 17 साल की थीं, तब एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल ने उन्हें प्रिंस एंड्रयू के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। सबूत के तौर पर एक तस्वीर सामने आई जिसमें एंड्रयू, वर्जीनिया की कमर पर हाथ रखे खड़े थे और पीछे मैक्सवेल मुस्कुरा रही थी। हालांकि एंड्रयू की टीम ने तस्वीर की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए, लेकिन दुनिया की नजरों में राजकुमार की छवि दागदार हो चुकी थी। उन पर न केवल यौन शोषण बल्कि ब्रिटिश ‘ट्रेड एनवॉय’ के रूप में अपने पद के दुरुपयोग के भी आरोप लगे।
इंटरव्यू जो ‘ताबूत की आखिरी कील’ बना
नवंबर 2019 में खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए प्रिंस एंड्रयू ने बीबीसी की पत्रकार एमिली मैटलिस को बकिंघम पैलेस में एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया। यह इंटरव्यू इतिहास की सबसे बड़ी ‘पीआर गलती’ साबित हुआ।
- अजीब दलीलें: वर्जीनिया के आरोपों को नकारते हुए एंड्रयू ने दावा किया कि उस रात वह एक ‘पिज़्ज़ा एक्सप्रेस’ में थे।
- मेडिकल बहाना: पसीने वाली बात पर उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान हुई एक मेडिकल स्थिति की वजह से उन्हें पसीना ही नहीं आता।
- पछतावे की कमी: उन्होंने एपस्टीन के साथ अपनी दोस्ती को “उपयोगी” बता दिया, जिससे जनता का गुस्सा और भड़क गया।
120 करोड़ का समझौता: न्याय या रफा-दफा?
फरवरी 2022 में जब जेल जाने का खतरा मंडराने लगा, तो एंड्रयू ने वर्जीनिया गफ्रे के साथ ‘आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट’ किया। ‘द गार्जियन’ और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, यह राशि लगभग 12 मिलियन पाउंड (करीब 120 करोड़ रुपये) थी। हालांकि उन्होंने कानूनी रूप से गुनाह नहीं कबूला, लेकिन जनता का सवाल वाजिब था— “अगर आप बेगुनाह थे, तो एक अजनबी महिला को चुप कराने के लिए करोड़ों रुपये क्यों बहाए?”
सजा: खिताब छिना, वर्दी उतरी
बदनामी इतनी बढ़ी कि क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय को कठोर फैसला लेना पड़ा। जनवरी 2022 में एंड्रयू की सभी मिलिट्री उपाधियाँ और शाही संरक्षण वापस ले लिए गए। उनसे ‘HRH’ (हिज रॉयल हाइनेस) का खिताब छीन लिया गया। किंग चार्ल्स तृतीय के शासन में उन्हें विंडसर के रॉयल लॉज से हटाने की खबरें भी आईं। आज वे न तो किसी शाही बालकनी पर नजर आते हैं और न ही किसी सरकारी जिम्मेदारी में।
सम्मान के बिना एक ‘परछाई’
प्रिंस एंड्रयू का गिरता ग्राफ आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा सबक है। यह बताता है कि चाहे कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो, वह नैतिक जिम्मेदारी से ऊपर नहीं हो सकता। 2026 में एंड्रयू एक ऐसी परछाई की तरह जी रहे हैं जो जेल तो नहीं गया, लेकिन जिसने अपना सम्मान, पद और प्रतिष्ठा—सब कुछ खो दिया है।









