West Asia Crisis: पश्चिम एशिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ से वापसी का रास्ता नजर नहीं आ रहा। ऊर्जा केंद्रों पर हमलों की धमकी, क्लस्टर बमों के आरोप और अमेरिका की सीधी चेतावनी ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं।
ईरान ने खुलेआम एलान कर दिया है कि उसके निशाने पर अब इजराइल के ऊर्जा केंद्र हैं। अगर इन पर हमला होता है, तो पूरे क्षेत्र की बिजली और तेल व्यवस्था ठप हो सकती है। दूसरी ओर, इजराइल ने दुनिया के सामने सनसनीखेज दावा किया है कि ईरान अपने हमलों में प्रतिबंधित ‘क्लस्टर बमों’ का इस्तेमाल कर नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है। (West Asia Crisis)
West Asia Crisis: अमेरिका की सीधी चेतावनी
आपको बता दें कि अब युद्ध की आग में अमेरिका भी सीधे कूदता नजर आ रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कड़े लहजे में कहा है कि “अगर ईरान ने तेल की वैश्विक सप्लाई लाइन को छेड़ने या रोकने की कोशिश की, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। हमारे जवाबी हमले इतने भीषण होंगे कि ईरान उसे संभाल नहीं पाएगा।” (West Asia Crisis)
इस संघर्ष की तपिश अमेरिकी सेना तक पहुँच चुकी है। पेंटागन के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के साथ जारी इस खींचतान में अब तक 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। इसलिए हालात की गंभीरता को देखते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले G7 देशों ने आपातकालीन बैठक बुलाई है।
इस बैठक में न केवल इजराइल-ईरान युद्ध को रोकने पर चर्चा होगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘तेल के झटके’ से बचाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। (West Asia Crisis)









