Akhilesh Yadav Ayodhya Visit: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या एक बार फिर केंद्र बिंदु बन गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और राम मंदिर न जाने के फैसले ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। गुरुवार को अयोध्या पहुंचे अखिलेश यादव ने जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर के दर्शन न करने पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन पर तीखा हमला बोला। इसके साथ ही, अयोध्या के कई प्रमुख संतों ने भी इस पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।
Akhilesh Yadav Ayodhya Visit: पवन पांडेय के आवास पर पहुंचे थे अखिलेश, उठाया मंदिर का मुद्दा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव अयोध्या में पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय के आवास पर आयोजित एक श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे डाली। यही नहीं, अखिलेश यादव ने राम मंदिर प्रशासन को घेरते हुए मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। हालांकि, हैरान करने वाली बात यह रही कि धार्मिक कथा स्थल से मुख्य राम मंदिर की दूरी महज 30 किलोमीटर थी, लेकिन इसके बावजूद सपा प्रमुख ने रामलला के दर्शन करने के लिए वहां जाना उचित नहीं समझा।
“सपा के हाथों पर कारसेवकों का खून लगा है” – ब्रजेश पाठक
अखिलेश यादव के इस व्यवहार पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने सपा प्रमुख को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। वह केवल तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करती है, इसी वजह से उनके नेता राम मंदिर जाने से कतराते हैं। हकीकत यह है कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं। ऐसे में वे किस मुंह से राम मंदिर जा सकते हैं?” (Akhilesh Yadav Ayodhya Visit)
ब्रजेश पाठक ने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को डर है कि अगर वे राम मंदिर गए, तो उनका अल्पसंख्यक (मुस्लिम) वोट बैंक उनसे छिटक जाएगा। उन्होंने कहा कि सपा के लिए राम मंदिर आस्था का विषय नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से राजनीति का जरिया है।
इसके अलावा, डिप्टी सीएम ने विपक्ष द्वारा विशेष जांच दल (SIT) और निर्वाचन आयोग पर उठाए जा रहे सवालों पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष केरल, तमिलनाडु या हिमाचल प्रदेश में जीतता है, तो चुनाव आयोग अच्छा होता है, लेकिन जब उत्तर प्रदेश में हार सामने दिखती है, तो वे अपनी खीज संवैधानिक संस्थाओं पर निकालने लगते हैं। उन्होंने दावा किया कि सपा को पता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी हार निश्चित है, इसलिए वे अभी से भूमिका बना रहे हैं।
अयोध्या के संतों में भारी आक्रोश
अखिलेश यादव के इस दौरे और राम मंदिर से दूरी बनाने के फैसले पर अयोध्या के संतों ने भी बेहद तल्ख टिप्पणियां की हैं। सनातन धर्म के प्रचारकों और प्रमुख संतों ने इसे राम भक्तों का अपमान बताया है। अयोध्या के प्रमुख संत दिवाकराचार्य महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर सपा प्रमुख अयोध्या आ रहे हैं, तो उन्हें सबसे पहले देश के करोड़ों राम भक्तों और उन कारसेवकों से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए, जिन पर सपा सरकार के समय गोलियां चलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि जब तक अखिलेश यादव अपनी पार्टी के पुराने कृत्यों के लिए क्षमा नहीं मांगते, तब तक उनके अयोध्या आने का संत समाज कड़ा विरोध करता रहेगा। (Akhilesh Yadav Ayodhya Visit)
कई अन्य संतों का कहना है कि अखिलेश यादव केवल राजनीतिक लाभ के लिए अयोध्या की धरती का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि उनके मन में सचमुच भगवान राम के प्रति श्रद्धा होती, तो वे 30 किलोमीटर की दूरी तय करके रामलला के दरबार में शीश अवश्य नवाते।
2027 चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति तेज
अखिलेश यादव का अयोध्या जाकर भी राम मंदिर न जाना और भाजपा का उन पर ‘कारसेवकों के खून’ और ‘तुष्टिकरण’ को लेकर हमला करना यह साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प और पूरी तरह से वैचारिक ध्रुवीकरण पर केंद्रित होने वाले हैं। जहां सपा मंदिर में कथित अव्यवस्था और चोरी के मुद्दे उठाकर पिछड़े और दलितों को लामबंद करने की कोशिश में है, वहीं भाजपा इसे सनातन विरोधी रुख बताकर बहुसंख्यक समाज को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। (Akhilesh Yadav Ayodhya Visit)









