“सियासत के शतरंज पर जब मजहब और भविष्य के सपने टकराते हैं, तो जुबानी जंग तेज होना लाजिमी है। असदुद्दीन ओवैसी का वह मशहूर विजन—कि ‘एक दिन हिजाब पहनने वाली लड़की देश की प्रधानमंत्री बनेगी’—एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लेकिन इस बार हमला बीजेपी से नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे से ही आया है। कांग्रेस नेता मसूद ने इसे न केवल असंभव बताया, बल्कि इसे ‘दिन में तारे देखने’ जैसा करार देकर ओवैसी के सियासी एजेंडे पर ही सवाल उठा दिए हैं। क्या यह बयान सिर्फ एक कटाक्ष है, या फिर अल्पसंख्यकों के वोट बैंक पर कब्जे की एक नई लड़ाई?”
असदुद्दीन ओवैसी के ‘हिजाब’ वाले पुराने बयान पर एक बार फिर सियासी गलियारों में चिंगारी सुलग गई है। कांग्रेस नेता मसूद ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए इसे पूरी तरह से अव्यावहारिक करार दिया है।

एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अक्सर अपने भाषणों में यह दोहराते रहे हैं कि वह अपने जीवनकाल में या उसके बाद एक हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। आज इस मुद्दे पर कांग्रेस के कद्दावर नेता मसूद (Imran Masood) ने अपनी प्रतिक्रिया देकर माहौल गरमा दिया है।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का संविधान साफ तौर पर कहता है कि सिर्फ एक धर्म का व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। बाबा साहब का संविधान कहता है कि भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है। मेरा सपना है कि एक दिन ऐसा आएगा जब हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी।”

इमरा मसूद का तर्क
मसूद ने कहा कि राजनीति भावनाओं से नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और संख्या बल से चलती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ओवैसी ऐसे बयान सिर्फ वोट ध्रुवीकरण के लिए देते हैं, जबकि असलियत में वे खुद जानते हैं कि मौजूदा राजनीतिक ढांचे में यह ‘दिन में तारे देखने’ जैसा है। इस पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा करने कि लिहाज सेसामने आया है।माना या भी जा रहा है कि मसूद का यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह खुद को ओवैसी की ‘कट्टर’ छवि से अलग करना चाहती है ताकि हिंदू और धर्मनिरपेक्ष वोट बैंक में सेंध न लगे।
कब उठा हिजाब का ये मुद्दा
हिजाब का मुद्दा कर्नाटक चुनाव के समय से ही देश में चर्चा का विषय रहा है, और अब 2026 की राजनीतिक चौसर पर इसे फिर से एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं एक बार फिर से महाराष्ट्र के सोलापुर में एक चुनावी सभा में बोलते हुए, ओवैसी ने तर्क दिया कि पाकिस्तान के संविधान में ऐसी समावेशिता नहीं है, जो दूसरे धर्मो के लोगों को बड़े पदों पर बैठने से रोकता है।

“दिलचस्प बात यह है कि यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की आहट है। ओवैसी जहां मुस्लिम पहचान की राजनीति को धार दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस ‘सर्वधर्म समभाव’ और वास्तविकता का हवाला देकर मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या ओवैसी इस पर पलटवार करते हैं या फिर ‘हिजाब’ का यह मुद्दा आने वाले चुनावों में एक बड़ा ध्रुवीकरण फैक्टर बनेगा।”









