Economic Survey 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया। वित्त मंत्री ने लोकसभा में दोपहर 12 बजे वित्त वर्ष 2026 के लिए आर्थिक सर्वे को पेश किया।
यह दस्तावेज 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट की रूपरेखा तैयार करता है। निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं, जो भारत के संसदीय और आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
Economic Survey 2026: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रोथ पूर्वानुमान
लोकसभा में पेश हुए आर्थिक सर्वे के मुताबिक, भारत ने मजबूत ग्रोथ मोमेंटम बनाए रखा है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश की अर्थव्यवस्था के 6.8-7.2% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। यह मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए ग्रोथ रेट के अनुमान 7.4 प्रतिशत से थोड़ा कम है। यह सर्वेक्षण केंद्रीय बजट से पहले पेश किया जाता है और अगले वित्तीय वर्ष के पॉलिसी एक्शंस के लिए एक बैकग्राउंड पेश करता है। (Economic Survey 2026)
भारत का आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था पर आधिकारिक वार्षिक “रिपोर्ट कार्ड” माना जाता है। यह सरकार का वह आधिकारिक दस्तावेज है जो बताता है कि पिछले एक साल में देश ने कितनी कमाई की, कहां खर्च किया और आने वाले समय के लिए हमारी तैयारी क्या है। आर्थिक सर्वेक्षण आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के नेतृत्व में तैयार किया जाता है। यह रिपोर्ट कार्ड मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर और संभावनाएं
सर्वे में वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता का गहन विश्लेषण किया गया है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को भी विस्तार से समझाया गया है। आर्थिक सर्वे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence) पर एक अलग चैप्टर दिया गया है, जिसमें AI से जुड़े अवसर और चुनौतियों पर विस्तार से विश्लेषण किया गया है। साथ ही ऑनलाइन गेमिंग और हेल्थ सेक्टर पर भी अलग से एक चैप्टर शामिल किया गया है। (Economic Survey 2026)
सर्वे ने दी यह भी चेतावनी
इसके अलावा अलग-अलग देशों के साथ ट्रेड डील पर भी विशेष अध्ययन शामिल किया गया है। FY27 घरेलू मांग और निवेश में मजबूती का अनुमान है। ग्लोबल ग्रोथ, स्थिरता को लेकर अनिश्चितता कायम है। सर्वे में सतर्क आशावाद का रुख अपनाया गया है। इसमें कहा गया है कि ग्लोबल माहौल नाज़ुक रहने के बावजूद भारत की ग्रोथ उम्मीद से बेहतर बनी हुई है। (Economic Survey 2026)
हालांकि, ट्रेड फ्रैगमेंटेशन, जियो-पॉलिटिक्स टेंशन और कारोबारी कमजोरियों के चलते निचले स्तर के जोखिम बढ़े हैं। सर्वे ने यह भी चेतावनी दी कि ग्लोबल झटकों का असर देरी से सामने आ सकता है, इसलिए अनिश्चित बाहरी परिस्थितियों के बीच सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।









