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‘हमने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा’, SIR विवाद पर अखिलेश यादव का चुनाव आयोग को खुला चैलेंज; बोले- ज्ञानेश कुमार सामने आकर दें जवाब

INDIA bloc Protest March

INDIA bloc Protest March: देश की चुनावी शुचिता और मुख्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा टकराव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। दिल्ली में विपक्ष के ‘इंडिया’ गठबंधन के बड़े मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें खुले मंच से चुनौती दे डाली है।

अखिलेश यादव ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग इतने ही निष्पक्ष हैं, तो ज्ञानेश कुमार खुद यहां सामने आएं और स्पष्टीकरण दें कि आखिर किसके फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे मतदाता सूचियों में हेरफेर किया गया। हमने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा है।

यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय की तरफ मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, और अभिषेक बनर्जी शामिल थे, उनको दिल्ली पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया। पुलिस वैन में बैठाए जाने के बाद अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ज्ञानेश कुमार से ही मिलाने ले जाया जा रहा है, जो अब सीधे उन्हें अपना इस्तीफा सौंपेंगे। (INDIA bloc Protest March)

INDIA bloc Protest March: क्या है पूरा मामला और “रंगे हाथों” पकड़ने का दावा?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का यह तीखा बयान मतदाता सूचियों में किए जा रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में सुनियोजित तरीके से विपक्षी दलों के पारंपरिक वोटरों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं।

चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बीच पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “हमें चिलचिलाती धूप या पसीने से कभी डर नहीं लगता। भाजपा के लोग डरे हुए हैं, इसीलिए हर जगह बैरिकेड्स लगाए गए हैं।” (INDIA bloc Protest March)

मतदान आयोग के सामने मतदाता दमन के विशिष्ट आरोपों को रखते हुए, सपा प्रमुख ने कहा, “यदि भाजपा इतनी निष्पक्ष है, तो ज्ञानेश कुमार यहां आकर बताएं कि नंदलाल निषाद के नाम पर किसके हस्ताक्षर जाली बनाए गए थे। दशरथ के नाम पर 100 फॉर्म किसने जाली बनाए? मुख्य चुनाव आयुक्त को यहां आकर जवाब देना चाहिए। हमने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा है… समाजवादियों ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा है।”

यादव ने आगे कहा, “नियमों में साफ तौर से लिखा है कि आप पांच से अधिक वोट नहीं हटा सकते या पांच से अधिक फॉर्म-7 आवेदन जमा नहीं कर सकते। फिर भी, 100 से अधिक फॉर्म धोखाधड़ी से भरे गए।” इसके बावजूद, लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षरों से सैकड़ों वोट काट दिए गए और मुद्रित फॉर्मों का अवैध इस्तेमाल किया गया। (INDIA bloc Protest March)

यादव के अनुसार, जब समाजवादी कार्यकर्ताओं ने इस धांधली को रंगे हाथों पकड़ा, तब भी स्थानीय जिलाधिकारियों या संलिप्त भाजपा नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पिछले विधानसभा और संसदीय चुनावों में चुनावी कदाचार को बार-बार नजरअंदाज किया है।

अखिलेश यादव ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव और यूपी उपचुनाव का किया जिक्र

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव निगरानी संस्था ने बार-बार पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया है। यादव ने पूछा, “इससे पहले भी चुनाव आयुक्त पर आरोप लगे थे। चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022 और 2024 में बेईमानी की। और बंगाल में तो यह उनके द्वारा खेला गया एक खुला खेल था। इसे कौन नहीं देख सकता?” अधिकारियों पर मतदाता दमन का आरोप लगाते हुए यादव ने कथित चुनावी कदाचार की तस्वीरों वाले पोस्टर लहराए। (INDIA bloc Protest March)

यादव ने विवादास्पद चंडीगढ़ महापौर चुनावों का जिक्र करते हुए एक पोस्टर दिखाते हुए कहा, “और उत्तर प्रदेश के उपचुनावों ने साफ तौर से दिखाया कि वोटों की चोरी कैसे की गई। ‘चंडीगढ़ कांड’ कौन भूल सकता है? आप चंडीगढ़ का यह दांव यहां देख सकते हैं।” पोस्टर पर लगी एक और तस्वीर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “और दूसरी तस्वीर में आप रिवॉल्वर भी देख सकते हैं, जो यह दर्शाती है कि किस तरह मतदान को रोका जा रहा था और लोगों को वोट डालने से रोका जा रहा था।”

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चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

यह राजनीतिक घमासान सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शीर्ष अदालत और स्वयं चुनाव आयोग के भीतर भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। हाल ही में यह खबरें सामने आई थीं कि चुनाव आयोग के भीतर ही ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया और फॉर्म-6 व फॉर्म-7 के बदलावों को लेकर गहरे आंतरिक मतभेद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए कई एकतरफा फैसलों पर करीब 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। (INDIA bloc Protest March)

अखिलेश यादव ने इस आंतरिक खींचतान को लोकतंत्र को नष्ट करने की एक बड़ी साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि जब एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था के भीतर ही आम सहमति नहीं बन पा रही है और सदस्य ही फैसलों पर उंगली उठा रहे हैं, तो जनता का भरोसा कैसे कायम रह सकता है?

इसी बीच, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में कड़ी रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि वह चुनाव आयोग के उन सभी फैसलों की समीक्षा करेगी जो कानून के सम्मत नहीं पाए जाएंगे, और जरूरत पड़ने पर उन्हें अमान्य भी घोषित किया जा सकता है। अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने मतदाता पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-6 में किए गए किसी भी प्रकार के मनमाने बदलावों को अपनी मंजूरी नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को और धार देने का मौका मिल गया है।

विपक्ष की मांग: ज्ञानेश कुमार के तहत न हो कोई भी चुनाव

सपा प्रमुख और ‘इंडिया’ गठबंधन ने अब एक सुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। अखिलेश यादव ने कड़े शब्दों में मांग की है कि भविष्य का कोई भी चुनाव वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त के अधीन नहीं कराया जाना चाहिए, क्योंकि उनके कार्यकाल में निष्पक्षता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि इस ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूचियों में हेरफेर को तुरंत नहीं रोका गया, तो वे इस आंदोलन को दिल्ली की सड़कों से उठाकर देश के हर गांव और हर गली तक ले जाएंगे। (INDIA bloc Protest March)

यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष के इन गंभीर आरोपों, “रंगे हाथों” पकड़ने के दावों और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग इस पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हैं। फिलहाल, भारतीय राजनीति में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर शुरू हुआ यह घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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Vaishali
Author: Vaishali

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