INDIA Bloc Protest March: भारतीय राजनीति में एक बार फिर से चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों के महागठबंधन INDIA ब्लॉक (INDIA Alliance) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और ‘वोटर धोखाधड़ी’ के आरोपों के खिलाफ मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग (EC) मुख्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (ECI) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाते हुए विपक्षी इंडिया ब्लॉक राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर उतर आया और चुनाव आयोग की ओर अपना विरोध मार्च शुरू किया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव जैसे शीर्ष नेताओं की अगुवाई में लगभग 19 विपक्षी दलों के 300 से अधिक सांसद इस ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च में शामिल हुए हैं। संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ यह लगभग 3 किलोमीटर लंबा मार्च दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी एकजुटता का एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।
INDIA Bloc Protest March: खर्गे का मोदी सरकार पर आरोप, लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर दी चेतावनी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने मोदी सरकार पर स्वतंत्रता के बाद नागरिकों को प्राप्त अधिकारों को छीनने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर ECI ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक मार्च के दौरान लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया गया तो लोग चुप नहीं रहेंगे। इंडिया ब्लॉक के चल रहे विरोध मार्च को संबोधित करते हुए खर्गे ने कहा “राजीव गांधी जी ने युवा मतदाताओं, महिला मतदाताओं, किसानों और गरीब लोगों को वे अधिकार दिए हैं जो आजादी के बाद उन्हें मिले थे। आज मोदी सरकार उन अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है।”
चुनावी प्रक्रिया को लेकर खर्गे का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
खर्गे ने कहा कि देश का निर्माण स्वतंत्रता संग्राम के जरिए हुआ था और आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए अब उस स्वतंत्रता को छीनने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए मतदान के अधिकार की रक्षा करना आवश्यक है। खर्गे ने कहा, “अगर हमें वोट देने का अधिकार मिला, तो लोकतंत्र बच जाएगा। अगर हमारा लोकतंत्र बच गया, तो सभी के अधिकारों की रक्षा होगी। संविधान की भी रक्षा होगी।”
उन्होंने चुनाव आयोग पर अपने ही सदस्यों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया और कहा कि चुनावी प्रक्रियाएं गलत तरीके से संचालित की गई थीं। कांग्रेस नेता ने कहा, “जब आपके मनोनीत सदस्यों, आपके लोगों ने बोलते समय गलती की, तो उन्होंने गलत चुनाव कराया और आज हमारे लोगों को गुमराह करके सत्ता में आने की कोशिश की गई है।”
खर्गे ने सत्ता में बैठे लोगों को पद छोड़ने की चेतावनी देते हुए कहा कि लोग चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा, “इसीलिए हम ऐसा कर रहे हैं। सबसे पहले, अपनी कुर्सी छोड़ दें। वरना, देश में हंगामा मच जाएगा। देश की जनता चुप नहीं बैठेगी। यह मेरी उन्हें चेतावनी है। लोग हर संभव प्रयास करेंगे, लेकिन वे अपनी स्वतंत्रता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। सरकार को ध्वस्त कर देना चाहिए।”
कांग्रेस नेताओं की मांग- ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, SIR रद्द कर हटाए गए वोट बहाल किए जाएं
इसी बीच, कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा, क्योंकि लोगों का चुनाव आयोग पर से विश्वास खत्म हो गया है। शुक्ला ने कहा, “यह निश्चित है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा। लोगों का चुनाव आयोग पर से विश्वास उठ चुका है।”
कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए। एसआईआर को रद्द किया जाना चाहिए। हटाए गए सभी वोटों को मतदाता सूची में वापस जोड़ा जाना चाहिए। इस साजिश के पीछे की ताकतों का पता लगाने और उन्हें बेनकाब करने के लिए उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।”
खर्गे का चुनाव आयोग पर सरकार के निर्देशों पर काम करने का आरोप
आज सुबह, खर्गे ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हासिल किए गए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को कमजोर किया जा रहा है और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सरकार के निर्देश पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “देखिए, हम उस अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिसके तहत सरकार लोगों के सभी अधिकारों को छीन रही है। और आज, आजादी के बाद हमें जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार मिला था, यह सरकार उसे भी खत्म करने की कोशिश कर रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त महज सरकार की कठपुतली है और दावा किया कि चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुसार काम किया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, सरकार की सिर्फ एक कठपुतली है। मोदी और शाह उन्हें जो भी करने को कहते हैं, वे ठीक वही करते हैं।”
खर्गे ने आगे आरोप लगाया कि संस्थानों के इस तरह के कामकाज से लोकतंत्र और संविधान को नुकसान होगा।
उन्होंने कहा, “इसी वजह से इस देश में लोकतंत्र नष्ट हो जाएगा, संविधान का अंत हो जाएगा और हिटलर जैसा शासन स्थापित हो जाएगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नागरिकों को दमन की ओर धकेला जा रहा है और कहा कि इंडिया गठबंधन अन्याय के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा। उन्होंने आगे कहा, “इसीलिए हम सभी इंडिया ब्लॉक के नेता संघर्ष कर रहे हैं, और हम संघर्ष जारी रखेंगे। हम अपना लक्ष्य हासिल करेंगे, और हम आप सभी के लिए इसे सुनिश्चित करेंगे।”
क्या है विवाद की जड़?
इस पूरे विरोध प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया है। खासतौर से चुनावी राज्य बिहार और देश के अन्य हिस्सों में इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं।विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया की आड़ में सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटाए जा रहे हैं या हेरफेर की जा रही है।
हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में लिए गए निर्णयों और आयोग के भीतर चल रहे कथित आंतरिक मतभेदों ने विपक्ष के संदेह को और गहरा कर दिया है। विपक्ष इसे चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर आघात मान रहा है। विपक्षी दल और विभिन्न छात्र संगठन लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और इस विवादास्पद SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
संसद से चुनाव आयोग तक मार्च और साझा रणनीति
30 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में इस साझा आंदोलन की रणनीति तैयार की गई थी।
2 से 8 अक्टूबर: पूरे देश के सभी जिलों में जिलाधिकारियों (DM) के दफ्तरों के बाहर “लोकतंत्र बचाओ” मार्च और राष्ट्रव्यापी आंदोलन।
6 अक्टूबर (आज): विपक्षी सांसदों का संसद भवन से चुनाव आयोग (ECI) मुख्यालय तक मार्च और घेराव।
राष्ट्रपति से मुलाकात: विपक्ष का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर उन्हें ‘संवैधानिक बाधाओं’ सेअवगत कराएगा।
1 नवंबर 2026: दिल्ली में एक विशाल मेगा रैली के साथ इस आंदोलन के पहले चरण का समापन।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ट्रैफिक डायवर्जन
INDIA ब्लॉक के इस बड़े मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी, विशेष रूप से लुटियंस दिल्ली और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी है। 5,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। कनॉट प्लेस, पटेल चौक, विंडसर पैलेस और अशोक रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है, जिसके चलते आम जनता को असुविधा से बचने के लिए मेट्रो सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
इससे पहले 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पूर्व सीएम आतिशी समेत 700 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था, जिसे देखते हुए इस बार प्रशासन बेहद सतर्क है।
विपक्ष की एकजुटता और कुछ अंदरूनी चुनौतियां
हालांकि यह मार्च विपक्ष की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन गठबंधन के भीतर सब कुछ पूरी तरह ठीक नहीं है। सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) ने राजनीतिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए खुद को 6 अक्टूबर के इस साझा प्रदर्शन से अलग रखा है। इसके बावजूद, कांग्रेस, वामपंथी दलों (CPI/CPM), और अन्य क्षेत्रीय क्षत्रपों ने पूरी ताकत से सड़कों पर उतरकर यह साफ कर दिया है कि वे मतदाता अधिकारों के हनन के खिलाफ पीछे हटने वाले नहीं हैं।
यह मार्च केवल एक नीति (SIR) का विरोध नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा और संसदीय चुनावों की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष की एक बड़ी लड़ाई है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को चुनाव पैनल द्वारा लिए गए एकतरफा फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी कर दिया है। अब देखना यह होगा कि सड़कों पर शुरू हुआ यह मार्च और कानूनी मोर्चे पर बढ़ती घेराबंदी चुनाव आयोग और सरकार को किस हद तक बैकफुट पर ला पाती है।









