Iran-US War: मिडिल ईस्ट में यानी खाड़ी देश इस समय एक ऐसे बारूद के ढेर पर बैठे हैं, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक महायुद्ध का रूप ले सकती है। इसी तनाव के बीच पर्दे के पीछे से आ रही एक खबर ने दुनिया भर के भू-राजनीतिक विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं।
खुफिया सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जर्मनी में अमेरिका और इजरायल ने 8 प्रमुख अरब देशों के सैन्य कमांडरों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की है। इस बैठक के सामने आने के बाद से ही यह सवाल तेजी से गूंज रहा है, क्या खाड़ी देश एक और भीषण महाजंग के मुहाने पर खड़े हैं?
Iran-US War: 6 महीने बाद पहली बड़ी सैन्य बैठक
इस सीक्रेट मीटिंग की मेजबानी अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) ने की। CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर द्वारा आयोजित इस सीक्रेट मीटिंग में ईरान युद्ध, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की सुरक्षा और यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों को लेकर एक बड़ा सुरक्षा खाका तैयार किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के पिछले 6 महीनों में इस तरह की यह पहली बड़ी संयुक्त सैन्य बैठक है। इस गुप्त महामंथन को लेकर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ खाड़ी में एक और महाजंग की आहट के रूप में देख रहे हैं। (Iran-US War)
जर्मनी में जुटी सैन्य महाशक्तियां: कौन-कौन हुआ शामिल?
बैठक में इजरायल के सैन्य प्रमुख के साथ-साथ 8 प्रमुख अरब मुल्कों के शीर्ष सैन्य कमांडर और खुफिया अधिकारी शामिल हुए। इन देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मिस्र, जॉर्डन और कतर जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इस बैठक को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसका फोकस ईरान और उसके समर्थित प्रॉक्सी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह, हूती और हमास) से निपटने के लिए एक संयुक्त हवाई और मिसाइल रक्षा नेटवर्क तैयार करना है।
सीक्रेट मीटिंग के 4 सबसे बड़े एजेंडे
खाड़ी में गहराते युद्ध के संकट के पीछे कई ठोस वजहें हैं, जिन्होंने लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे इजरायल और अरब देशों को एक साझा मेज पर बैठने के लिए मजबूर कर दिया है। अमेरिकी और इजरायली खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस कथित गुप्त बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। (Iran-US War)
1 ईरान के साथ युद्ध की रणनीतिक समीक्षा
इजरायली सेना के प्रमुख जनरल इयाल ज़मीर ने सभी अरब देशों को विभिन्न मोर्चों पर चल रहे सैन्य ऑपरेशनों और ईरान के खिलाफ इजरायल की रणनीतिक तैयारियों के बारे में ब्रीफिंग दी।
2. अमेरिकी सेना की खाड़ी में मौजूदगी
बैठक के दौरान CENTCOM प्रमुख ने सभी अरब सहयोगियों को आश्वस्त किया कि अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बावजूद, अमेरिका मिडिल ईस्ट से अपनी सेनाएं नहीं हटाएगा। अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करेगा।
3. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और बाब अल-मंडेब की सुरक्षा
ईरान द्वारा व्यापारिक मार्गों को ठप करने की धमकियों के बीच, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में कमर्शियल शिपिंग और जहाजों की आवाजाही बढ़ाने का प्लान शेयर किया। इसके साथ ही, लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले रणनीतिक जलडमरूमध्य ‘बाब अल-मंडेब’ पर हूतियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने पर भी विचार हुआ। (Iran-US War)
4. सऊदी अरब को इजरायल की खुफिया मदद
यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब पर हमले तेज किए हैं। इस खतरे को देखते हुए, अमेरिका की मध्यस्थता में सऊदी अरब और इजरायल के बीच खुफिया और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हुई। इजरायल ठीक उसी तरह सऊदी को सर्विलांस और खुफिया सहायता दे सकता है, जैसी वह वर्तमान में UAE को दे रहा है।
अरब-इजरायल का नया सुरक्षा ढांचा
साल 2020 में हुए अब्राहम अकॉर्ड्स के बाद से इजरायल और अरब देशों के बीच सैन्य सहयोग लगातार बढ़ा है। इजरायल को अमेरिकी यूरोपीय कमांड से हटाकर CENTCOM के दायरे में शामिल किए जाने के बाद से यह तालमेल और आसान हो गया है।
चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल ने UAE में अपना आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम और उसे संचालित करने वाले सैनिक तैनात किए हैं। सऊदी अरब के साथ औपचारिक रिश्ते न होने के बावजूद, सऊदी सुरक्षा अधिकारी अमेरिकी अधिकारियों की उपस्थिति में इजरायली खुफिया एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं। (Iran-US War)
क्या खाड़ी में महायुद्ध तय है?
इस सीक्रेट मीटिंग की टाइमिंग बेहद नाजुक वक्त पर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का सैन्य जमावड़ा यह साफ संकेत देता है कि अमेरिका और इजरायल आने वाले दिनों में ईरान और उसके समर्थित गुटों जैसे हूती, हिजबुल्लाह और इराकी मिलिशिया के खिलाफ किसी बड़े मिलिट्री ऑपरेशन की तैयारी में हैं।
अगर ईरान अपनी ‘डिफ्यूजन स्ट्रेटेजी’ के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा और खाड़ी क्षेत्र एक विनाशकारी पूर्ण विकसित महायुद्ध की आग में झुलस सकता है। (Iran-US War)









