Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल देखने को मिली, जब बड़ी संख्या में सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार (UPSSSC अभ्यर्थी), आशा वर्कर्स और कोविड-19 काल के संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के लखनऊ स्थित आधिकारिक आवास का घेराव करने पहुंचे।
विभिन्न जनपदों से आए इन प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी लंबित मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की गुहार लगाई। उप-मुख्यमंत्री, जो राज्य के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं, उनके घर के बाहर इस त्रिकोणीय विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। इस बड़े प्रदर्शन के कारण सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करना पड़ा और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
Lucknow: UPSSSC नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों का आक्रोश
प्रदर्शन में शामिल उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के अभ्यर्थियों की मांगें लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का मुख्य गुस्सा फॉरेस्ट गार्ड भर्ती-2023 और जूनियर असिस्टेंट टाइपिस्ट के 3,284 पदों जैसी विभिन्न परीक्षाओं के परिणामों में हो रही देरी को लेकर था। कई अभ्यर्थी ऐसे थे जो आयु सीमा में छूट की मांग कर रहे थे, जबकि कुछ का चयन होने के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। युवाओं का आरोप है कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को लटकाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
आशा कार्यकर्ताओं की मानदेय वृद्धि की मांग
राज्य के 75 जनपदों से आईं सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें मिलने वाला मौजूदा मानदेय बेहद कम है। उन्होंने मांग की कि उनके मानदेय को बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह किया जाए ताकि वे इस महंगाई के दौर में सम्मानजनक जीवन जी सकें। (Lucknow)
एक महिला आशा कार्यकर्ता ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “हमसे चौबीसों घंटे काम लिया जाता है, लेकिन मानदेय के नाम पर महज कुछ हजार रुपये दिए जाते हैं। महंगाई के इस दौर में इतने कम पैसों में गुजारा करना नामुमकिन है। जब तक उपमुख्यमंत्री जी हमसे खुद मिलकर आश्वासन नहीं देते, हम यहां से नहीं हटेंगे।”
कोविड कर्मचारियों का दर्द
कोरोना महामारी के भीषण संकट के दौरान अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने वाले आउटसोर्सिंग और संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भी इस घेराव में अपनी आवाज बुलंद की। महामारी का दौर बीत जाने के बाद इन कर्मचारियों को सेवामुक्त कर दिया गया था या उनके वेतन में कटौती की गई थी। उनकी मुख्य मांगें उन्हें स्वास्थ्य विभाग में स्थायी रोजगार देना, सेवा विस्तार प्रदान करना और बकाया वेतन का भुगतान करना है। (Lucknow)
मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने मीडिया और प्रशासन के सामने अपना दर्द बयां किया। एक कोविड कर्मचारी ने भावुक होते हुए कहा, “जब हर कोई अपने घरों में बंद था, तब हमने दिन-रात अस्पतालों में कोविड मरीजों की सेवा की। आज सरकार ने हमें दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया है। हमारे पास परिवार पालने का कोई साधन नहीं बचा है।”
उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक का आश्वासन: “सरकार युवाओं के साथ”
प्रदर्शन की गंभीरता और युवाओं के आक्रोश को देखते हुए उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक खुद अपने आवास से बाहर आए और प्रदर्शनकारियों के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं और स्वास्थ्य कर्मियों की शिकायतों को बेहद संवेदनशीलता से सुना। मीडिया से बात करते हुए बृजेश पाठक ने कहा, “ये सभी युवा हमारे अपने परिवार की तरह हैं और हमारी सरकार युवाओं के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।”
उप-मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उन्होंने UPSSSC के वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंध में बात की है और युवाओं की समस्याओं को हल करने के निर्देश दिए हैं। अभ्यर्थियों का एक दल जल्द ही आयोग के अधिकारियों से मिलकर अपनी मांगों को टेबल पर रखेगा ताकि नियुक्तियां जल्द से जल्द फाइनल की जा सकें। आशा कार्यकर्ताओं और कोविड काल के संविदा कर्मचारियों की मांगों पर भी उन्होंने विभागीय स्तर पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया है। (Lucknow)









