Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ के बेहद चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ में अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने इस वारदात को क्रूरता की सारी हदें पार करने वाला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला माना और दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा दी।
सजा का एलान करते हुए जज ने महाभारत का उदाहरण देते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की, “अधर्म के काम पर सजा देना ही धर्म होता है।” उन्होंने साफ किया कि अपराधियों ने जिस नृशंसता के साथ इस कृत्य को अंजाम दिया, उसके लिए समाज में कोई माफी स्वीकार नहीं की जा सकती।
Meerut Blue Drum Murder Case: क्या था पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की रात को मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में अंजाम दी गई थी। मृतक सौरभ राजपूत (29 वर्ष) मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। जब वे फरवरी 2025 के आखिरी हफ्ते में विदेश से वापस लौटे, तो उन्हें अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके पुराने स्कूल के दोस्त साहिल शुक्ला के बीच चल रहे अवैध संबंधों की भनक लग गई। सौरभ इस रिश्ते में बाधा बन रहे थे, जिसके कारण मुस्कान और साहिल ने मिलकर उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची।
3 मार्च की रात को मुस्कान ने पूरी प्लानिंग के तहत सौरभ के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। जब सौरभ अचेत हो गए, तो उसने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला को घर बुला लिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर चाकू से वार कर और गला रेतकर सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए उन्होंने शव के टुकड़ों को एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में भर दिया। लाश की बदबू बाहर न आए, इसके लिए उन्होंने बाजार से सीमेंट और बालू मंगवाया और ड्रम को ऊपर तक सीमेंट के कंक्रीट घोल से भरकर पूरी तरह सील कर दिया। (Meerut Blue Drum Murder Case)
गुमराह करने की कोशिश और गिरफ्तारी
वारदात को अंजाम देने के अगले ही दिन मुस्कान अपनी सात साल की बेटी को मायके छोड़ आई और प्रेमी साहिल के साथ शिमला और मनाली फरार हो गई। परिवार और दोस्तों को गुमराह करने के लिए वे सौरभ के ही मोबाइल फोन से मैसेज भेजते रहे ताकि सबको लगे कि सौरभ किसी बिजनेस ट्रिप पर बाहर गए हैं।
हत्याकांड का खुलासा 17-18 मार्च 2025 को हुआ। जब सौरभ के भाई राहुल को शक हुआ और वह उनके घर पहुंचे, तो अंदर से अजीब बदबू आ रही थी। पड़ोसियों और बच्चों से मिली कुछ संदिग्ध जानकारियों के बाद पुलिस को बुलाया गया। जब घर के अंदर रखे उस रहस्यमयी नीले ड्रम को खोला गया, तो उसमें से कंक्रीट में जमे हुए सौरभ के शव के अवशेष बरामद हुए। पुलिस ने पीछा कर मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया। (Meerut Blue Drum Murder Case)
अदालत की सख्त कार्यवाही और गवाही
इस हाई-प्रोफाइल मामले का ट्रायल मेरठ की जिला अदालत में करीब 13 महीने तक चला। केस की गंभीरता को देखते हुए फास्ट ट्रैक मोड में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में कुल 126-127 तारीखें पड़ी। अभियोजन पक्ष की तरफ से 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इनमें वे दुकानदार भी शामिल थे, जिन्होंने दोषियों को नीला ड्रम, सीमेंट, बालू और कटर/चाकू बेचे थे।
फॉरेंसिक रिपोर्ट्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और मोबाइल लोकेशन ने यह पूरी तरह साबित कर दिया कि हत्या के वक्त साहिल उसी घर में मौजूद था और दोनों ने साथ मिलकर ही साजिश रची थी। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को ही दोनों को हत्या (IPC 302 / BNS) और साक्ष्य मिटाने के तहत दोषी करार दे दिया था और सजा के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी। (Meerut Blue Drum Murder Case)
फैसला सुनते ही रो पड़े दोषी, मां बोलीं- “न्याय मिल गया”
14 अक्टूबर 2026 को जिला कारागार से दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश किया गया। जब जज ने फांसी की सजा का एलान किया, तो मुस्कान और साहिल कोर्ट रूम के वर्चुअल स्क्रीन के सामने रोने लगे। मुस्कान ने हाथ जोड़कर कम से कम सजा की भीख मांगी और अपनी बच्चियों का ख्याल रखने की बात कही। इस मामले में एक बेहद हैरान करने वाली बात यह रही कि खुद मुस्कान के माता-पिता ने अदालत को लिखित में दिया था कि यदि उनकी बेटी को मौत की सजा दी जाती है, तो वे इसका विरोध नहीं करेंगे।
अदालत में मौजूद सौरभ की मां रानू राजपूत और भाई फैसला सुनकर रो पड़े। मां ने रुंधे गले से कहा, “हमें शांति से न्याय मिल गया। अगर आप साथ नहीं रहना चाहते तो अलग हो जाइए, लेकिन किसी की औलाद को इस तरह बेरहमी से मत मारिए।” (Meerut Blue Drum Murder Case)
यह ऐतिहासिक फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि कानून की नजरों से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, चाहे वह कितनी ही चालाकी से साजिश क्यों न रचे। कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी महिला को भारत में दुर्लभतम मामलों में ही मृत्युदंड की सजा दी जाती है, जो इस केस की गंभीरता को दर्शाता है।









