‘न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे’, NCERT बुक के विवादित चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

NCERT Book Controversy

NCERT Book Controversy: देश की सर्वोच्च अदालत ने आज शिक्षा के गलियारों में हो रही एक बड़ी चूक पर अपना ‘रौद्र रूप’ दिखाया है। कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शब्द के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त ऐतराज जताया है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) की फटकार के बाद आनन-फानन में NCERT ने माफी मांगते हुए किताबों के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है।

यह मामला कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से जुड़ा है। इस किताब के एक अध्याय में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को समझाते हुए ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ जैसे गंभीर शब्दों का प्रयोग किया गया था। जैसे ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया, कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा पर हमला करार दिया।

NCERT Book Controversy: क्यों खतरनाक है ‘कच्ची उम्र’ में गलत पाठ?

आपको बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि न्यायपालिका लोकतंत्र का तीसरा और सबसे मजबूत स्तंभ है। अगर बच्चों को कच्ची उम्र में ही यह पढ़ाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो आने वाली पीढ़ी का कानून और इंसाफ से भरोसा उठ जाएगा। और कोर्ट ने सवाल उठाया कि बिना किसी ठोस डेटा या संवैधानिक आधार के इतने बड़े संस्थान के लिए ‘भ्रष्ट’ शब्द का सामान्यीकरण कैसे किया जा सकता है?

यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि संस्थान को बदनाम करने की कोशिश है। और कोर्ट ने यह भी कहा कि, 8वीं कक्षा के छात्र (13-14 साल की उम्र) तार्किक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे आलोचना और व्यवस्थागत दोष के बीच का अंतर समझ सकें। कोर्ट के अनुसार, यह पाठ बच्चों के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति नकारात्मकता का बीज बोने जैसा है। (NCERT Book Controversy)

NCERT की बिना शर्त माफी

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगते हुए देश भर में इस किताब की मौजूदा प्रतियों की बिक्री और वितरण को तुरंत रोक दिया गया है। और कोर्ट को अस्वासन दिया है कि, विवादित चैप्टर को विशेषज्ञों की समिति द्वारा फिर से लिखा जाएगा। फिलहाल कोर्ट कि सख़्ती के बाद नसरत ने ऑनलाइन पोर्टल से इस विवादास्पद हिस्से को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

लोकतंत्र में आलोचना का स्वागत है, लेकिन शिक्षा के नाम पर संस्थाओं की नींव खोदने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख एक नजीर है कि देश की भावी पीढ़ी को क्या परोसा जा रहा है, इसकी निगरानी अनिवार्य है। (NCERT Book Controversy)

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