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छात्रों पर कार्रवाई के खिलाफ पप्पू यादव का शक्ति प्रदर्शन, अमित शाह के इस्तीफे की उठाई मांग; बोले- ‘युवाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं’

Patna Protest

Patna Protest: पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने मंगलवार को पटना में पेपर लीक, बेरोजगारी और सीवान में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) व अन्य छात्र संगठनों के साथ मिलकर बिहार के मुख्यमंत्री आवास की ओर एक आक्रोश मार्च का नेतृत्व किया। यह मार्च पटना के इनकम टैक्स गोलंबर और डाकबंगला चौराहे की तरफ बढ़ा, जहाँ भारी पुलिस बल तैनात था।

Patna Protest: सीएम आवास मार्च पर वाटर कैनन, छात्रों के समर्थन में उतरे पप्पू यादव

मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। इस दौरान पप्पू यादव ने छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई। इस विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी शामिल हुए।

‘युवाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं’, पप्पू यादव ने सरकारों को घेरा

पप्पू यादव और छात्र संगठनों का आरोप है कि सीवान में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बर कार्रवाई की गई। सांसद ने आरोप लगाया कि युवाओं और बच्चों के घरों पर जाकर उन्हें मुकदमों और जेल भेजने की धमकियां देकर डराया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मार्च के दौरान बिहार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही की मांग की। (Patna Protest)

अमित शाह के इस्तीफे की उठाई मांग

विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, पूर्णिया के सांसद ने कहा, “युवाओं पर हिंसा, उन्हें जेल भेजना, उनके घरों में जाकर उन्हें धमकाना, उनके खिलाफ मामले दर्ज करना, बच्चों को डराना… यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हैं।” पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि यदि गृह मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो युवाओं के अधिकारों के लिए यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। पप्पू यादव ने कहा कि देश के युवाओं के लिए वे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में इस आंदोलन को और तेज करेंगे।

सीवान फायरिंग विवाद से लेकर एफआईआर वापसी तक, जानिए पूरे छात्र आंदोलन की कहानी

बता दें, बिहार में जुलाई 2026 में हुआ छात्र आंदोलन मुख्य रूप से NEET (UG) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भड़का था। छात्र संगठनों जैसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद बिहार सरकार को झुकना पड़ा और छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने पड़े। (Patna Protest)

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में 22 जुलाई 2026 से बिहार में आंदोलन की शुरुआत हुई। राज्य के कुल 20 जिले इस आंदोलन की चपेट में आए, जिनमें जहानाबाद, कटिहार, बेगूसराय, दरभंगा, सारण (छपरा) और सिवान मुख्य रूप से प्रभावित रहे। पुलिसिया दमन के खिलाफ छात्र संगठनों द्वारा 25 जुलाई 2026 को बिहार बंद का आह्वान किया गया, जिसके दौरान कई जगहों पर भारी तोड़फोड़ और चक्काजाम हुआ।

59 एफआईआर वापस, नाबालिग छात्रों की रिहाई; दबाव में झुकी बिहार सरकार

आंदोलन का सबसे बड़ा विवाद सिवान जिले में सामने आया, जहां 26 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों को खदेड़ने के लिए एक पुलिस कांस्टेबल ने AK-47 राइफल से हवा में फायरिंग कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और विपक्षी नेताओं (जैसे तेजस्वी यादव) द्वारा सवाल उठाने के बाद उस जवान को तुरंत निलंबित कर दिया गया। राज्य भर में कुल 59 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें 999 नामजद और लगभग 5,000 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। (Patna Protest)

पुलिस ने 407 लोगों को गिरफ्तार किया और 15 जिलों से 694 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें कई नाबालिग छात्र भी शामिल थे। प्रदर्शनों के दौरान 164 पुलिसकर्मी व अधिकारी और 19 आम नागरिक/छात्र घायल हुए, जबकि 19 वाहनों को नुकसान पहुंचा।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला (यू-टर्न)

चारों तरफ से बढ़ते दबाव, छात्र संगठनों के अल्टीमेटम और दिल्ली में हुए समझौते के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने 27-28 जुलाई 2026 को एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने आदेश दिया कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6:00 बजे तक प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज सभी 59 एफआईआर और कानूनी नोटिस वापस लिए जाएंगे।

हिरासत में लिए गए सभी 339 नाबालिगों को तुरंत छोड़ दिया गया और जेलों (जैसे पटना की बेउर जेल) में बंद अन्य छात्रों की कागजी औपचारिकताएं पूरी कर रिहाई की प्रक्रिया शुरू की गई। सरकार ने साफ किया कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक या उनके भविष्य को नुकसान पहुंचाने वाली कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। (Patna Protest)


Vaishali
Author: Vaishali

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