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PM Modi Car Diplomacy: पुतिन के बाद अब जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के साथ पीएम मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’, जानिए ‘कार टॉक’ के मायने

भारत की ‘कार डिप्लोमेसी’ (Car Diplomacy) आजकल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रोटोकॉल तोड़कर विदेशी मेहमानों को अपनी कार में साथ बैठाना प्रधानमंत्री मोदी का एक ऐसा अंदाज है, जो केवल गहरी दोस्ती और अटूट भरोसे का संकेत देता है। पुतिन के बाद अब जर्मन चांसलर के साथ उनकी यह केमिस्ट्री वैश्विक राजनीति के नए समीकरण लिख रही है।


“जब दो शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्ष अपनी बुलेटप्रूफ गाड़ियों का काफिला छोड़कर एक ही कार में सवार हो जाएं, तो समझ लीजिए कि दुनिया का नक्शा बदलने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक बार फिर अपनी सिग्नेचर ‘कार डिप्लोमेसी’ से सबको हैरान कर दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Putin) के बाद, अब जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ (Olaf Scholz) वह दूसरे वैश्विक नेता बन गए हैं जिन्हें पीएम मोदी ने अपनी कार में बगल वाली सीट पर जगह दी। दिल्ली के जाम के बीच बंद शीशों के पीछे हुई यह ‘कार टॉक’ केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के बीच बनते एक नए और मजबूत पावर ब्लॉक की दहाड़ है।”


दोनों देशों के रिश्ते काफी शानदार

इसके बाद पीएम मोदी और जर्मन चांसलर दोनों देशों के औद्योगिक दिग्गजों से भी मिले। उद्योग जगत की शीर्ष हस्तियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ हुई बैठक के दौरान मोदी और मर्ज ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि वर्तमान समय में जर्मनी की दो हजार कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं।

पुतिन और प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला के साथ भी पीएम मोदी की कार में तस्वीरें
गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉर्डन दौरे के दूसरे दिन क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने खुद कार चलाकर पीएम मोदी को अम्मान के जॉर्डन म्यूजियम तक पहुंचाया। इस पहल ने दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद संबंधों को दर्शाया। केवल औपचारिक स्वागत या सुरक्षा का ही मामला नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रतीक था कि भारत और जॉर्डन की दोस्ती व्यक्तिगत और गर्मजोशी भरे स्तर पर भी मजबूत है।


रणनीतिक महत्व: कूटनीति में एक ही कार में सफर करने का मतलब होता है, ‘अत्यधिक व्यक्तिगत विश्वास’ (High Personal Trust)। यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक दीवार नहीं है।


“पीएम मोदी की यह ‘कार डिप्लोमेसी’ दिखाती है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों को केवल फाइलों और मेजों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत रिश्तों की गर्माहट देता है। पुतिन के बाद चांसलर शोल्ज़ को यह सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि भारत पश्चिम (West) और पूर्व (East) के बीच संतुलन बनाने की अपनी कला में माहिर हो चुका है। जब ये दोनों दिग्गज एक साथ कार से बाहर निकले, तो उनके चेहरों की मुस्कान ने बता दिया कि आने वाले समय में भारत और जर्मनी के रिश्ते नई ऊंचाइयों को छूने वाले हैं। यह सवारी केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक की नहीं थी, बल्कि यह ‘विश्वमित्र’ भारत की वैश्विक धाक की ओर एक बड़ी छलांग थी।”

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