Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का पारंपरिक शस्त्र पूजन एक बार फिर देश भर में सुर्खियों में है। विजयादशमी (दशहरे) के पावन अवसर पर कुंडा के ऐतिहासिक बेंती राजभवन में भव्य शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया, जहां बड़ी मेज पर एक, दस, 100, 200 नहीं… बल्कि 500 से अधिक छोटे-बड़े आधुनिक और पारंपरिक हथियार सजाए गए थे। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित मंत्रों और शंखनाद के बीच राजा भैया ने पूरे विधि-विधान से हथियारों का तिलक कर पूजन संपन्न किया।

Pratapgarh News: बेंती राजभवन में दिखा राजसी ठाठ और पारंपरिक रंग
दशहरे के मौके पर कुंडा की बेंती कोठी एक बार फिर पुरानी रियासती और क्षत्रिय परंपरा की गवाह बनी। इस खास अनुष्ठान के लिए राजा भैया बिल्कुल पारंपरिक क्षत्रिय वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने धोती-कुर्ता और सिर पर केसरिया साफा धारण कर रखा था। राजभवन के मुख्य हॉल में स्थापित भगवान हनुमान जी की विशाल प्रतिमा के सामने एक लंबी मेज लगाई गई थी, जिस पर सैकड़ों की संख्या में चमचमाती बंदूकें, राइफल्स, पिस्टल और अन्य घातक हथियार करीने से सजाए गए थे।
वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा
शस्त्र पूजा के इस अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए राजभवन में खासतौर से विद्वान पंडितों को आमंत्रित किया गया था। जैसे ही आचार्यों ने वैदिक मंत्रों का पाठ शुरू किया, पूरा बेंती महल धार्मिक और वीर रस के माहौल से सराबोर हो गया। राजा भैया ने सभी शस्त्रों पर कुमकुम और चंदन का तिलक लगाया, पुष्प और अक्षत अर्पित किए और अंत में धूप-दीप जलाकर महाआरती की। इस भव्य आयोजन में न केवल कुंडा बल्कि आसपास के जिलों से भी भारी संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि और राजा भैया के खास समर्थक अपने-अपने लाइसेंसी हथियार लेकर पहुंचे थे। (Pratapgarh News)
सनातन संस्कृति और क्षत्रिय परंपरा का आधार
धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी विजयादशमी को ‘अधर्म पर धर्म’ और ‘असत्य पर सत्य’ की विजय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था और देवी दुर्गा ने महिषासुर का मर्दन किया था। भारतीय संस्कृति में इस दिन को किसी भी नए कार्य की शुरुआत, विजय यात्रा और शस्त्रों के पूजन के लिए परम शुभ माना गया है।
500 से अधिक हथियारों का जखीरा: किसका था मालिकाना हक?
इतनी बड़ी संख्या में हथियारों को एक साथ देखकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाएं तेज हो गईं कि आखिर एक व्यक्ति के पास इतने हथियार कैसे हो सकते हैं। खबरों के मुताबिक, इस पूजा में शामिल कुल हथियारों में से केवल 8 शस्त्र राजा भैया के परिवार के थे। बाकी के सभी 490+ हथियार राजा भैया के समर्थकों, सुरक्षाकर्मियों और क्षेत्रीय नेताओं के लाइसेंसी असलहे थे, जिन्हें हर साल की तरह इस बार भी इस सामूहिक और भव्य अनुष्ठान का हिस्सा बनाया गया था। (Pratapgarh News)
“हाथी के दांत दिखाने के और…” – राजा भैया का बयान हुआ वायरल
शस्त्र पूजन समाप्त होने के बाद राजा भैया ने वहां मौजूद विशाल जनसमूह और समर्थकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए एक ऐसा बेबाक बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया और वहां मौजूद लोग जमकर तालियां बजाने लगे। उन्होंने कहा, “ये ना जानो बस इतने ही हैं… हाथी के दांत दिखाने के अलग होते हैं, खाने के अलग होते हैं।” राजा भैया के इस चुटीले और रहस्यमयी बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे उनकी पारंपरिक क्षत्रिय छवि से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे उनके विरोधियों के लिए एक अप्रत्यक्ष लेकिन सख्त संदेश मान रहे हैं।
शक्ति और सनातन परंपरा का प्रतीक है यह आयोजन
क्षत्रिय परंपरा में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। राजा भैया के समर्थकों का कहना है कि यह आयोजन शक्ति प्रदर्शन के बजाय सांस्कृतिक विरासत, साहस और कर्तव्यनिष्ठा से जुड़ी सनातन परंपरा का प्रतीक है, जिसका पालन उनका परिवार पीढ़ियों से करता आ रहा है। (Pratapgarh News)









