Rashtrapati Bhavan: आज का दिन भारत के आत्मसम्मान के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। आज वह दिन है जब रायसीना हिल्स से उस नाम की विदाई हो रही है, जिसने दशकों तक हमें गुलामी की याद दिलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में एक ऐसा एलान किया है, जिससे हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
Rashtrapati Bhavan: लुटियंस की विदाई, राजाजी का आगमन
राष्ट्रपति भवन के आंगन से अब एडविन लुटियंस की प्रतिमा हटाई जाएगी और वहां शान से विराजेगी स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा। यह सिर्फ एक पत्थर की मूर्ति बदलना नहीं है, यह भारत के इतिहास को उसकी असली पहचान दिलाने का महा-संकल्प है!
आजादी के 78 साल बाद भी, सत्ता के सबसे बड़े केंद्र राष्ट्रपति भवन के दिल में एक अंग्रेज वास्तुकार की प्रतिमा लगी थी। लेकिन अब वक्त बदल चुका है, भारत बदल चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि नए भारत में गुलामी की मानसिकता की कोई जगह नहीं है। (Rashtrapati Bhavan)
कर्तव्य पथ से राष्ट्रपति भवन तक मिटते गुलामी के निशान
एडविन लुटियंस, जिन्होंने दिल्ली की ईंट-ईंट पर ब्रिटिश हुकूमत का नाम लिखा, अब उनकी प्रतिमा को हटाया जा रहा है। उनकी जगह लेंगे चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जिन्हें दुनिया ‘राजाजी’ के नाम से जानती है। एक ऐसे मनीषी, एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने आजाद भारत की कमान संभाली थी। (Rashtrapati Bhavan)
यह फैसला दर्शाता है कि भारत अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। कर्तव्य पथ से लेकर राष्ट्रपति भवन तक, हर जगह से ब्रिटिश छाप को मिटाया जा रहा है। इतिहास की किताबों में जो पन्ने विदेशी आक्रांताओं और प्रशासकों के नाम थे, अब वहां भारतीय वीरों की गाथाएं लिखी जा रही हैं। यह बदलाव इस बात का सबूत है कि हम अब किसी के पिछलग्गू नहीं, बल्कि दुनिया के सिरमौर हैं!
तो तैयार हो जाइए एक नए इतिहास के साक्षी बनने के लिए। लुटियंस का दौर अब अतीत बन जाएगा और ‘राजाजी’ का नाम राष्ट्रपति भवन की दीवारों पर भारत के स्वाभिमान की कहानी कहेगा। (Rashtrapati Bhavan)









