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योगी सरकार की योजनाएं बनाम अखिलेश के वादे, महिलाओं-युवाओं-किसानों पर फोकस; 2027 से पहले सियासत गर्म

UP Election 2027

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक ऐसा दांव शुरू हो चुका है, जिसने पूरे राज्य के सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। इस बार चुनावी लड़ाई सिर्फ मुद्दों, भाषणों या बड़ी-बड़ी रैलियों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह लड़ाई अब ‘फ्रीबीज’ यानी मुफ्त सौगातों और नकद योजनाओं के सबसे बड़े अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। इस बार का मुख्य एंगल साफ दिख रहा है कि सत्ता की चाबी उसी के पास जाएगी, जो फ्रीबीज के इस खेल में बाजी मारेगा।

एक तरफ सत्ता में बैठी योगी आदित्यनाथ सरकार है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव हैं, जिन्होंने वादों की झड़ी लगा दी है। लेकिन इस पूरे सियासी गणित में सबसे बड़ी हकीकत यह नजर आ रही है कि विपक्ष चाहे कितने भी बड़े-बड़े वादे क्यों न कर ले, बीजेपी आचार संहिता लागू होने से पहले ही इतनी योजनाओं की जमीनी शुरुआत कर देगी कि विपक्ष के लिए उसकी बराबरी कर पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

UP Election 2027: 60+ महिलाओं को मुफ्त बस सफर, पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ा

योगी सरकार की तरफ से महिलाओं, युवाओं, किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को साधने के लिए सरकारी खजाने से सीधी मदद की पूरी तैयारी कर ली गई है। 60 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ के जरिए बस सफर पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया है। इसके साथ ही गांव-गांव में काम करने वाले 57,000 से ज्यादा पंचायत सहायकों का मंथली मानदेय 6,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 9,000 रुपये कर दिया गया है और उन्हें कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस व मैटरनिटी बेनिफिट्स भी दिए जा रहे हैं।

युवा-किसान योजनाओं के साथ महिलाओं पर बड़ा दांव, चुनाव से पहले ₹50 हजार की मदद का दावा

युवाओं के लिए पुलिस डिपार्टमेंट और दूसरे सरकारी विभागों में बंपर नौकरियां और अपॉइंटमेंट लेटर बांटने का काम तेजी से चल रहा है। किसानों को सब्सिडी और आर्थिक मदद का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। लेकिन इस बार फ्रीबीज की इस रेस में सबसे बड़ा दांव महिलाओं को मिलने वाले नकद पैसों का है। चर्चाएं और सरकारी तैयारियां बहुत तेजी पर हैं कि योगी सरकार चुनाव की घोषणा से पहले महिलाओं को आकर्षित करने के लिए ₹50,000 की सीधी नकद सहायता देने वाली योजना का ऐलान कर सकती है। (UP Election 2027)

इस योजना का ढांचा इस तरह तैयार किया जा रहा है कि ₹20,000 की पहली किस्त चुनाव से पहले ही सीधे महिलाओं के बैंक खातों में चली जाए और बाकी रकम चुनाव के बाद किस्तों में मिले। हालांकि इस योजना पर अभी सरकार की आधिकारिक मुहर का इंतजार है, लेकिन इसके साथ ही महिलाओं को खुद का काम शुरू करने के लिए ₹1 लाख तक का बिना ब्याज वाला लोन देने और टॉप करने वाली छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत फ्री पेट्रोल स्कूटी देने की तैयारी भी पूरी हो चुकी है। छात्रों को ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के तहत फ्री टैबलेट और स्मार्टफोन बांटने का अभियान भी जोरों पर है।

अखिलेश यादव का बड़ा चुनावी ऐलान, महिलाओं के लिए ₹40 हजार सालाना पेंशन का वादा

योगी सरकार के इस बड़े मास्टरस्ट्रोक का तोड़ निकालने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनावी वादों का बहुत बड़ा पिटारा खोल दिया है। अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि अगर 2027 में उनकी सरकार बनती है, तो वे महिलाओं के लिए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ लाएंगे, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर साल ₹40,000 की पेंशन दी जाएगी। यह असल में 2012-17 वाली ‘समाजवादी पेंशन योजना’ का एक नया और बहुत बड़ा रूप है, जिसमें पहले सालाना ₹6,000 मिलते थे और अब उस रकम को करीब सात गुना बढ़ा दिया गया है। (UP Election 2027)

अखिलेश यादव का दावा है कि वे महिलाओं को अलग-अलग योजनाओं के जरिए कुल मिलाकर ₹2 लाख तक की मदद पहुंचाएंगे, जो चुनाव में एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। अखिलेश यादव सिर्फ नए वादे ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव के दौर की पुरानी और सबसे पॉपुलर ‘कन्या विद्या धन योजना’ को भी नए अवतार में वापस लाने की बात कह रहे हैं। मुलायम सिंह के दौर में 12वीं पास छात्राओं को ₹20,000 की मदद दी जाती थी, जिसे 2012 में सत्ता में आने के बाद अखिलेश ने बढ़ाकर ₹30,000 कर दिया था। अब अखिलेश ने वादा किया है कि 2027 में एसपी की सरकार बनने पर 12वीं पास छात्राओं को ₹50,000 की एकमुश्त रकम दी जाएगी।

अखिलेश यादव के महिला वोटरों के लिए 5 बड़े वादे

एसपी प्रवक्ता मनोज यादव का भी यही कहना है कि उनकी सरकार ने हमेशा महिलाओं और बेटियों को सीधा आर्थिक फायदा दिया है और 2027 में आने के बाद इस मदद को और कई गुना बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा अखिलेश यादव ने महिलाओं और छात्राओं को साधने के लिए 5 और बड़े वादे जनता के सामने रखे हैं। पहला वादा है 12वीं और ग्रेजुएशन की छात्राओं को फ्री लैपटॉप, स्मार्टफोन और ग्रामीण इलाकों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए फ्री साइकिल बांटने का। दूसरा बड़ा वादा कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए महीने में 2 दिन की स्पेशल लीव देने का है, जो उनके मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान बिना किसी मेडिकल सर्टिफिकेट या कागजी झंझट के मिलेगी। (UP Election 2027)

तीसरा वादा यह है कि बेसहारा, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को ‘लोहिया आवास योजना’ के तहत 100% सब्सिडी पर फ्री मकान दिए जाएंगे और उस घर की रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से महिला के नाम पर ही होगी। चौथा और सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा अखिलेश यादव ने सरकारी स्कूलों को लेकर उठाया है। उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार ने ‘मर्जर’ के नाम पर पहली से आठवीं तक के 26,000 से ज्यादा सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद कर दिया है, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के बच्चों का हुआ है।

अखिलेश ने वादा किया है कि उनकी सरकार आते ही इन सभी बंद स्कूलों को तुरंत दोबारा खोला जाएगा और छात्राओं की पूरी फीस माफ होगी। इसके लिए समाजवादी पार्टी ‘बंद स्कूल जब खुल जाएंगे, पीडीए के बच्चे पढ़ेंगे’ और ‘स्कूल बुलाता है’ जैसे जमीनी अभियान भी चला रही है। बीजेपी अक्सर अखिलेश यादव के इन भारी-भरकम वादों के बजट पर सवाल उठाती है कि इतना पैसा आएगा कहां से। लेकिन अगर आंकड़ों और बजट के गणित को समझें, तो वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब 2012 में एसपी ने लैपटॉप और कन्या विद्या धन बांटा था, तब उत्तर प्रदेश का कुल बजट करीब ₹2.10 लाख करोड़ हुआ करता था। (UP Election 2027)

₹7.36 लाख करोड़ से ज्यादा के बजट के बीच फ्रीबीज की सियासत

आज यूपी का सालाना बजट बढ़कर ₹7.36 लाख करोड़ से भी ऊपर पहुंच चुका है, यानी बजट तीन गुना से भी ज्यादा बड़ा हो चुका है। जब राज्य का बजट इतना बड़ा होता है, तो सरकार के पास जनता के कल्याण और फ्रीबीज की योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करने की सीधी गुंजाइश बन जाती है। लेकिन इन सारे गणित और वादों के बीच सबसे बड़ा सच यही है कि इस बार फ्रीबीज की इस राजनीति में बीजेपी ही बाजी मारती दिख रही है।

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि विपक्षी दल केवल चुनाव जीतने के बाद इन योजनाओं को लागू करने का वादा कर सकते हैं, जबकि सत्ता में बैठी बीजेपी के पास आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले ही इन योजनाओं को चालू करने और पहली किस्त सीधे जनता के खातों में भेजने का सबसे बड़ा मौका है। जब एक तरफ खाते में आया हुआ सीधा पैसा होगा और दूसरी तरफ सिर्फ भविष्य का वादा, तो आम वोटर का झुकाव सीधा जमीनी फायदे की तरफ ही होता है। (UP Election 2027)

आचार संहिता से पहले योजनाओं को लागू करने की चुनौती, सपा-भाजपा के वादों पर टिकी नजर

बीजेपी की रणनीति एकदम साफ है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान और आचार संहिता लगने से पहले ही इतने सारे सरकारी आदेश, नकद ट्रांसफर, टैबलेट-स्मार्टफोन का बंटवारा और बस यात्रा जैसी मुफ्त सुविधाएं लागू कर दी जाएं कि विपक्ष का हर बड़ा वादा उसके सामने फीका पड़ जाए। अखिलेश यादव चाहे कितना भी बड़ा दांव खेल लें, लेकिन बीजेपी के पास समय रहते उसका तोड़ निकालने और योजनाओं को सीधे जमीन पर उतारने का जो फायदा है, वही उसे फ्रीबीज के इस महामुकाबले में सबसे आगे खड़ा करता है। ऐसे में 2027 का यह सियासी दंगल पूरी तरह से इस बात पर टिक गया है कि वादों और दावों की इस होड़ में जनता किसके साथ खड़ी होती है।

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