UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासी फिजाओं में 2027 के विधानसभा चुनाव की गर्मी अभी से महसूस होने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने चुनावी अभियान का बिगुल फूंक दिया है, और इसकी कमान खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संभाली है। आज से शुरू हुए अपने दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे के साथ, नितिन नवीन ने साफ कर दिया है कि बीजेपी ‘मिशन 2027’ के लिए पूरी तरह तैयार है और इस बार पार्टी का लक्ष्य पिछली जीत से भी बड़ी लकीर खींचना है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उत्तर प्रदेश के इस विशेष सांगठनिक प्रवास के दौरान नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की रणनीति को धार देंगे।
UP Election 2027: मेरठ में चार अहम बैठकें, युवा शक्ति से लेकर बूथ प्रबंधन तक पर मंथन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में डेरा डाल रहे हैं। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से होते हुए जब नितिन नवीन का काफिला मेरठ के लिए रवाना हुआ, तो गाजियाबाद सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। दौरे के पहले दिन मेरठ में लगातार 4 उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं।
नितिन नवीन ने मेरठ में ‘क्रांतिधरा’ के शहीदों को नमन करते हुए आईएनए शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपने कार्यक्रमों की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी के मांगल्य ऑडिटोरियम में आयोजित 4800 युवाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं वाले एक विशाल ‘युवा सम्मेलन’ को संबोधित किया।
यहां उन्होंने हजारों युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 2027 की जीत की नींव युवा शक्ति ही रखेगी। उन्होंने युवाओं (Gen-Z) से संवाद करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का मंत्र दिया। इसके तुरंत बाद, उन्होंने “शक्ति केंद्र सम्मेलन” में हिस्सा लिया, जहां पश्चिमी क्षेत्र के बूथ स्तर के पदाधिकारियों को चुनावी प्रबंधन के गुर सिखाए गए। (UP Election 2027)
विपक्ष पर प्रहार: ‘वोट की ताकत’ बनाम ‘बाहुबल’
नितिन नवीन ने अपने भाषणों में विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “एक समय था जब उत्तर प्रदेश में सरकारें बंदूक की नोक पर चलती थीं, लेकिन आज डबल इंजन की सरकार में जनता के वोट का राज है।” उन्होंने विपक्ष पर संविधान और विकास की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि जनता अब अराजकता को नहीं, बल्कि विकास को चुनती है। उनका यह बयान सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन पर निशाना था, जो संविधान बचाने के नाम पर बीजेपी को घेरते रहे हैं।
दूसरे दिन का एजेंडा: सहारनपुर और मां शाकुंभरी देवी के दर्शन
दौरे के दूसरे दिन, यानी 22 सितंबर को, नितिन नवीन सहारनपुर जाएंगे। वे सिद्धपीठ मां शाकुंभरी देवी के दर्शन करेंगे और संतों का आशीर्वाद लेंगे। पार्टी की परंपरा को निभाते हुए, वे एक सामान्य कार्यकर्ता के घर पर दोपहर का भोजन करेंगे। यह कदम जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने के लिए है कि शीर्ष नेतृत्व उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। इसके बाद वे सहारनपुर में संगठन के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। (UP Election 2027)
जमीनी कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध वर्ग से जुड़ाव
बीजेपी हमेशा से अपनी सांगठनिक मजबूती और ‘कैडर-बेस्ड’ राजनीति के लिए जानी जाती है। मेरठ में वे समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध जनों के साथ बैठक करेंगे, ताकि सरकार के कामकाज का फीडबैक लिया जा सके और समाज के हर वर्ग को ‘मिशन 2027’ से जोड़ा जा सके। अपने इस दौरे के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष मेरठ के ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर में महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे और सहारनपुर में प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां शाकुंभरी देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लेंगे।
यह है भाजपा का पश्चिम क्षेत्र
भाजपा ने संगठनात्मक दृष्टि से उत्तर प्रदेश को छह क्षेत्रों में बांटा है। पश्चिम क्षेत्र में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 14 जिले शामिल हैं। इनमें सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, संभल और रामपुर आते हैं। इन जिलों में 71 विधानसभा सीटें और 14 लोकसभा सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां पर 40 सीटें जीती थीं। सपा-रालोद गठबंधन 31 सीटों पर जीता था। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सात सीटें जीती थीं और सात सीटों पर विपक्ष जीता था। (UP Election 2027)
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का यह दो दिवसीय यूपी दौरा केवल एक सामान्य सांगठनिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह 2027 के महासमर के लिए पार्टी के अभेद्य चक्रव्यूह की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े प्रशासनिक रुख और केंद्रीय नेतृत्व की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति के सहारे बीजेपी उत्तर प्रदेश में विपक्ष के गठबंधन को कड़ा जवाब देने की तैयारी कर चुकी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह अभियान आने वाले दिनों में पूरे राज्य में दिखाई देगा, जिससे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंचना तय है।









