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आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज, अखिलेश यादव का BJP पर हमला; बोले- भाजपा नहीं चाहती सबको बराबर का मौका मिले…

UP Politics

UP Politics: समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर ‘लैटरल एंट्री’ (सीधे भर्ती) और ‘नॉट सूटेबल’ जैसे शब्दों की आड़ में आरक्षण प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सीधे आरक्षण खत्म करने के बजाय इन अप्रत्यक्ष तरीकों से पिछड़ों और दलितों के संवैधानिक अधिकारों की लूट कर रही है।

उत्तर प्रदेश में विवादास्पद 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर जोर देते हुए यादव ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया और दावा किया कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया गया है। (UP Politics)

UP Politics: 69,000 शिक्षक भर्ती विवाद- दलित और पिछड़े वर्ग के अधिकारों में कटौती का आरोप

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में दलित और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण के लाभों को बुरी तरह से कम कर दिया गया है।

यादव ने दावा किया कि 69,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण दिशानिर्देशों का 23.14% उल्लंघन हुआ। उन्होंने बताया कि दलित उम्मीदवारों को संवैधानिक रूप से 21% आरक्षण का अधिकार था, लेकिन इस विशेष भर्ती में उन्हें केवल 16.2% आरक्षण ही मिला। (UP Politics)

NCBC रिपोर्ट का हवाला देकर सपा प्रमुख ने उठाए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यादव ने आरोप लगाया कि इस घोटाले से लगभग 20,000 सीटें प्रभावित हुईं। यादव ने जोर देकर कहा, ‘2022 के चुनावों से पहले, सरकार ने खुद स्वीकार किया था कि आरक्षण की लूट हुई थी और आगे कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पक्षपात सरासर अन्याय के बराबर है।’ (UP Politics)

यादव ने तर्क दिया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित आरक्षण प्रणाली 2014 तक सुचारू रूप से कार्य करती रही। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वर्तमान केंद्र सरकार के आने से सुरक्षा उपायों को समाप्त करने की दिशा में एक बदलाव आया है।

अखिलेश यादव ने कहा, ‘जो लोग पक्षपाती हैं, वे गद्दार भी हैं। पक्षपात अन्याय है। यह अधिकारों को छीन लेता है। आरक्षण स्वयं एक अधिकार है। बाबासाहेब ने संविधान में आरक्षण लागू किया था, और यह 2014 तक ठीक से काम करता रहा। 2014 में जब से नारों से प्रेरित सरकार सत्ता में आई है। आरक्षण को कमजोर करने का उसका सपना सर्वोपरि हो गया है। जो लोग अब तक छिपे हुए थे, वे अब खुलकर सामने आ गए हैं।’ (UP Politics)

‘आरक्षण खत्म नहीं कर सकते, इसलिए अप्रत्यक्ष तरीके अपना रही है भाजपा’ — अखिलेश यादव

यादव के अनुसार, चूंकि सत्ताधारी पार्टी आरक्षण को सीधे तौर पर समाप्त नहीं कर सकती, इसलिए वंचित समुदायों को वंचित रखने के लिए उसने अप्रत्यक्ष तरीकों का सहारा लिया है। यादव ने आरोप लगाया कि योग्य नहीं पाया गया वाक्यांश का इस्तेमाल हाशिए पर रहने वाले योग्य उम्मीदवारों को नौकरी देने से इनकार करने के बहाने के रूप में किया जा रहा है। (UP Politics)

सपा नेता ने आरोप लगाया कि वे नौकरियों में आरक्षण पर हमला कर रहे हैं और ‘उपयुक्त नहीं’ होने का बहाना बना रहे हैं। भाजपा सत्ता में रहते हुए कुप्रथा कर रही है। भाजपा एक प्रभावशाली ताकत है जो बेईमानी से जीतना चाहती है और यहां तक कि अदालत को भी प्रभावित करने की कोशिश करती है, जो एक तीसरे अंपायर की तरह काम करती है।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा वंचित समुदायों को वंचित बनाए रखना चाहती है और पार्टी पर आरक्षण को अप्रत्यक्ष रूप से कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘वे वंचित समुदायों को शारीरिक श्रम तक सीमित रखना चाहते हैं ताकि प्रभुत्वशाली समूह एक बार फिर अपना वर्चस्व स्थापित कर सकें। वे आरक्षण को खुलेआम लूटना चाहते हैं। चूंकि वे आरक्षण को सीधे तौर पर समाप्त नहीं कर सकते, इसलिए वे अप्रत्यक्ष तरीकों का सहारा ले रहे हैं।’ (UP Politics)

बुलडोजर राजनीति पर तंज- ‘असमानता मिटाने में इस्तेमाल हो सरकारी ताकत’

राज्य सरकार द्वारा दंडात्मक कार्रवाई के लिए बुलडोजर के विवादास्पद उपयोग पर कटाक्ष करते हुए, यादव ने सुझाव दिया कि इस मशीनरी को सामाजिक सुधार की ओर पुनर्निर्देशित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर भाजपा बुलडोजर का इस्तेमाल करना चाहती है, तो उसे असमानता को दूर करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर किसी को उसका उचित हिस्सा और अधिकार मिले।’

यह दोहराते हुए कि आरक्षण दान का नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार का मामला है, यादव ने कहा, ‘केवल आरक्षण के माध्यम से ही असमानता को दूर किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए विकासात्मक कार्य करता है, जैसे कि एक्सप्रेसवे का निर्माण, लैपटॉप वितरण या रोजगार के अवसर पैदा करना, तो उसके घर को गंगाजल से विधिपूर्वक ‘शुद्ध’ किया जाता है।’ (UP Politics)

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