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UP Voter List Controversy: क्या यूपी की वोटर लिस्ट में जोड़े गए 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर? चुनाव आयोग ने बताया पूरा सच

UP Voter List Controversy

UP Voter List Controversy: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से ठीक पहले वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल होने लगा कि यूपी की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख रहस्यमयी या संदिग्ध मतदाताओं के नाम जोड़ दिए गए हैं। इस खबर ने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले का सच उजागर किया है।

निर्वाचन आयोग ने इन सभी दावों को पूरी तरह से गलत, तथ्यहीन और भ्रामक करार देते हुए खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है, ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की रिपोर्ट में क्या दावे किए गए थे और चुनाव आयोग ने इस पर क्या सफाई दी है।

UP Voter List Controversy: क्या था पूरा विवाद और ‘रहस्यमयी वोटर्स’ का दावा?

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान से जुड़ा है, जो अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था। 6 जनवरी 2026 को जब ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित हुई, तो एक खोजी पत्रकारिता वेबसाइट ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि यूपी सीईओ की वेबसाइट पर 16.18 लाख नए आवेदकों का पर्सनल डिटेल्स उपलब्ध नहीं है।

इस रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह आरोप लगाया जाने लगा कि चुनाव आयोग ने गुपचुप तरीके से या किसी प्रशासनिक चूक के कारण 16 लाख से ज्यादा ‘फर्जी’ या ‘संदिग्ध’ मतदाताओं को सूची में जगह दे दी है। (UP Voter List Controversy)

CEO नवदीप रिणवा ने बताया पूरा सच: नहीं है कोई गड़बड़ी

विवाद बढ़ता देख उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने साफ किया कि मतदाता सूची में कोई भी नाम रहस्यमयी तरीके से नहीं जोड़ा गया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता और कानूनी नियमों के तहत अपनाई गई है।

घर-घर जाकर सर्वे में एकत्र किए गए थे फॉर्म-6

CEO नवदीप रिणवा के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच SIR के गणना चरण के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर व्यापक सर्वे किया था। यह 16.18 लाख संख्या असल में उन पात्र नागरिकों के फॉर्म-6 (नाम जुड़वाने के लिए आवेदन फॉर्म) थे, जो इस सर्वे के दौरान एकत्र किए गए थे। (UP Voter List Controversy)

कौन थे ये मतदाता?

ये वे पात्र नागरिक थे, जिनके नाम 27 अक्टूबर 2025 को पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले की पुरानी मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। चूंकि उनके नाम पहले से दर्ज नहीं थे, इसलिए उनके नाम वाले ‘प्री-प्रिंटेड एन्यूमरेशन फॉर्म’ नहीं छापे जा सकते थे। ऐसे सभी छूटे हुए पात्र लोगों को बीएलओ द्वारा मौके पर ही फॉर्म-6 दिया गया और उनके नाम जोड़ने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की गई।

डेटा छिपाने या गायब होने के आरोपों पर सफाई

वेबसाइट पर डेटा न होने के दावे पर सीईओ ने कानूनी नियमों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्राप्त होने वाले दावों और आपत्तियों को ही ‘फॉर्म-9’ की सूची में शामिल कर वेबसाइट पर सार्वजनिक प्रदर्शित किया जाता है। ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले घर-घर जाकर जो फॉर्म-6 एकत्र किए जाते हैं, उनके लिए यह नियम लागू नहीं होता। इसलिए इसे ‘डेटा छिपाना’ कहना पूरी तरह गलत धारणाओं पर आधारित है। (UP Voter List Controversy)

नियमों के तहत हुआ सत्यापन

आयोग ने साफ किया कि इन सभी 16.18 लाख आवेदनों की बीएलओ द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन की गई और उसके बाद ही संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा इन्हें नियमों के तहत स्वीकृत किया गया। फॉर्मों को स्वीकार या अस्वीकार करने का कोई मनमाना फॉर्मूला नहीं होता, बल्कि पूरी जांच के बाद ही सही पाए गए नामों को जोड़ा गया है।

निष्पक्षता और पारदर्शिता का भरोसा

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ किया कि यह पूरा पुनरीक्षण अभियान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारत निर्वाचन आयोग के कड़े नियमों के तहत चलाया गया है। इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सक्रिय सहभागिता रही है और किसी भी मान्यता प्राप्त दल या व्यक्ति ने इस प्रक्रिया पर पहले कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

इससे साफ हो गया है कि 16 लाख से अधिक मतदाता कोई “रहस्यमयी” या “फर्जी” वोटर नहीं हैं, बल्कि ये उत्तर प्रदेश के वे आम नागरिक हैं जो मतदाता सूची में शामिल होने के पात्र थे और जिन्हें चुनाव आयोग के घर-घर अभियान के तहत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। चुनाव आयोग ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी किसी भी भ्रामक और निराधार खबरों पर विश्वास न करें। (UP Voter List Controversy)





Vaishali
Author: Vaishali

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