Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के 4.60 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए आज का दिन बड़ी सौगात लेकर आया है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के लोक भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 4.60 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को एक बड़ा तोहफा दिया। सीएम योगी ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए मात्र एक क्लिक के जरिए 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डिजिटल रूप से ट्रांसफर की।
इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले मेधावी और जरूरतमंद छात्रों को संबल प्रदान करना है, ताकि धन के अभाव के कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा अधूरी न छूटे।
Uttar Pradesh: विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को मिला सीधा लाभ
योगी सरकार की इस योजना के तहत समाज के हर पिछड़े, वंचित और जरूरतमंद वर्ग के छात्र-छात्राओं को पारदर्शी तरीके से वित्तीय सहायता पहुंचाई गई है।
| छात्र वर्ग | लाभांवित छात्रों की संख्या | ट्रांसफर की गई कुल राशि |
| पिछड़ा वर्ग (OBC) | 2,23,615 विद्यार्थी | ₹60.01 करोड़ |
| अनुसूचित जाति (SC) | 1,59,959 विद्यार्थी | ₹64.54 करोड़ |
| सामान्य वर्ग (General) | 38,084 विद्यार्थी | ₹11.43 करोड़ |
| अल्पसंख्यक वर्ग (Minority) | 38,901 विद्यार्थी | ₹12.06 करोड़ |
‘2 अक्टूबर’ को बैंक बंद होने के कारण 3 अक्टूबर को हुआ ट्रांसफर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साफ किया कि सरकार की मंशा छात्रों को जल्द से जल्द यह लाभ देने की थी। आमतौर पर यह स्कॉलरशिप फरवरी-मार्च के महीनों में मिलती थी, लेकिन छात्रों की जरूरतों को देखते हुए इसे समय से पहले ही जारी कर दिया गया है। चूंकि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के उपलक्ष्य में बैंक बंद थे, इसी वजह से इस प्रक्रिया को शनिवार, 3 अक्टूबर को संपन्न किया गया। त्योहारों के इस मौसम में समय से पहले मिली यह छात्रवृत्ति यूपी के विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन दिवाली गिफ्ट की तरह है।
तकनीक से बदली व्यवस्था, भ्रष्टाचार और बिचौलियों का अंत
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न और जीरो बैलेंस अकाउंट की सराहना की। सीएम योगी ने कहा कि पहले के समय में यदि 100 बच्चों के लिए छात्रवृत्ति जारी होती थी, तो कागजी खानापूर्ति और बाबुओं की मनमानी के कारण वह केवल 60-70 बच्चों तक ही पहुंच पाती थी। रास्ते में ही भ्रष्टाचार के कारण छात्र ठगा महसूस करता था और उसे मिलने वाली सहायता राशि से अधिक तो उसके आने-जाने और दफ्तरों के चक्कर काटने में खर्च हो जाते थे। (Uttar Pradesh)
आज उत्तर प्रदेश की पूरी छात्रवृत्ति प्रणाली को ऑटोमेशन और आधार-लिंक्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जोड़ दिया गया है। अब बिना किसी बिचौलिए या मानवीय हस्तक्षेप के, सरकार के खजाने से निकला एक-एक पैसा सीधे विद्यार्थी के बैंक खाते में सुरक्षित पहुंच जाता है।
2017 से पहले और अब के यूपी में जमीन-आसमान का अंतर
सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की छवि अलग बन गई थी। उस दौर में छात्रों को समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलती थी। यहां तक कि वर्ष 2016-17 में तो अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों की छात्रवृत्ति तक रोक दी गई थी। पहले सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर थीं और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ज्यादातर लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती थीं।
सीएम योगी ने आंकड़ों के जरिए अपनी सरकार के प्रयासों को जोर किया। उन्होंने कहा कि पहले पूरे उत्तर प्रदेश में स्कॉलरशिप के लिए केवल ₹2,900 करोड़ का बजट आवंटित होता था। आज भाजपा सरकार इसे बढ़ाकर ₹6,200 करोड़ से अधिक कर चुकी है। पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य के करीब 69 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति का सीधा लाभ दिया गया। आने वाले समय में यह दायरा बढ़कर 70 लाख से भी पार होने की उम्मीद है। उन्होंने मंच से कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का उदाहरण देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि उस समय की सरकारों ने समय पर स्कॉलरशिप दी होती, तो हमारे मंत्रियों को आगे बढ़ने के लिए इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता। (Uttar Pradesh)
शिक्षा और प्रगति के पथ पर उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम केवल वित्तीय मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहा है। सीएम योगी ने संबंधित विभागों को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रदेश का कोई भी पात्र बच्चा तकनीकी या प्रशासनिक कमियों के कारण छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहना चाहिए। दाखिला लेते ही छात्रों के वेरिफिकेशन और स्कॉलरशिप की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।









