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West Bengal: नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासी भूचाल, कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान गिरफ्तार, राहुल गांधी बोले- ‘न डरेंगे, न झुकेंगे’

West Bengal

West Bengal: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले राज्य में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना के तुरंत बाद कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह से हमलावर हो गया है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है और संकल्प लिया है कि “कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी। हम लड़ेंगे भी और जीतेंगे भी।”

West Bengal: क्या है पूरा मामला?

नंदीग्राम सीट पर आगामी 6 अक्टूबर को उपचुनाव निर्धारित है, जिसके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक मोर्चे पर इस चुनाव ने उस समय एक बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को खुला समर्थन देने का ऐलान किया।दरअसल, टीएमसी खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा अचानक अपना नाम वापस ले लेने के बाद विपक्षी एकजुटता दिखाते हुए ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन किया था।

हैरान करने वाली बात यह रही कि इस समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर बंगाल पुलिस ने मिलन प्रधान को रेयापाड़ा इलाके से चुनाव प्रचार के दौरान हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, मिलन प्रधान के खिलाफ साल 2007 के प्रसिद्ध नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े कुछ पुराने आपराधिक मामले और हत्या के आरोप लंबित थे, जिनमें उनके खिलाफ वारंट जारी था।

राहुल गांधी का तीखा पलटवार- “बीजेपी चुनावी मुकाबला ही खत्म करना चाहती है”

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर लिखा, “नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है यह लोकतंत्र की हत्या है।भाजपा का निष्पक्ष चुनाव में कोई भरोसा ही नहीं है। यही कारण है कि वे कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी तो कभी पार्टी चोरी के रास्ते सत्ता पर काबिज रहना चाहते हैं। वे असल में चुनाव लड़ना ही नहीं चाहते, बल्कि पूरी चुनावी प्रतियोगिता को ही समाप्त कर देना चाहते हैं।” (West Bengal)

राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आगे संकल्प लिया कि विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस पार्टी इन दबावों के आगे घुटने नहीं टेकेगी और इस दमनकारी राजनीति के खिलाफ सड़कों से लेकर चुनावी मैदान तक एकजुट होकर मुकाबला करेगी।

मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल ने भी बोला धावा

सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस कार्रवाई को ‘वोट चोरी और चुनाव चोरी’ का एक बेशर्म प्रयास बताया है। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एक तरफ भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी जांच एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग करके विपक्षी उम्मीदवारों को निशाना बना रही है।

कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस कार्रवाई की घोर निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक 19 साल पुराने ठंडे बस्ते में पड़े मामले को ठीक चुनाव प्रचार के बीच में निकालकर उम्मीदवार को गिरफ्तार करना यह दर्शाता है कि भाजपा लोकतंत्र को पूरी तरह हाईजैक करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल किया था और हलफनामा दिया था, तब प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन प्रचार में कांग्रेस को मिल रहे भारी जनसमर्थन को देखकर विरोधी खेमे में घबराहट पैदा हो गई है। (West Bengal)

भाजपा का रुख- कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई

विपक्ष के इन तीखे हमलों और ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के आरोपों को भाजपा ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं और नेताओं का साफ कहना है कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी किसी राजनीतिक द्वेष का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक विशुद्ध रूप से कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई है। भाजपा का तर्क है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह किसी भी पार्टी का उम्मीदवार क्यों न हो। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पुराने गंभीर आपराधिक मामले और अदालत के वारंट लंबित हैं, तो पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह कानून के मुताबिक अपना काम करे।

नंदीग्राम में सियासी पारा सातवें आसमान पर

इस घटना ने नंदीग्राम उपचुनाव को देश के सबसे चर्चित और तनावपूर्ण राजनीतिक मुकाबलों में से एक बना दिया है। जहाँ एक तरफ भाजपा इसे कानून व्यवस्था और अपराधियों पर शिकंजे के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और एकजुट विपक्षी ताकतें इसे तानाशाही और चुनावी धांधली का उदाहरण बताकर जनता के बीच जा रही हैं। मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में नंदीग्राम की जनता इस सियासी रस्साकशी पर अपना क्या फैसला सुनाती है। (West Bengal)


Vaishali
Author: Vaishali

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