Saudi Arabia Houthi War: मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे चौतरफा हवाई हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। इस गंभीर सुरक्षा संकट के बीच, सऊदी अरब की मदद के लिए मिस्र खुलकर सामने आ गया है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हरसंभव सैन्य और रणनीतिक सहयोग देने का ऐलान किया है।
Saudi Arabia Houthi War: हूती विद्रोहियों के हमलों से दहल उठा सऊदी अरब
हाल के हफ्तों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के रणनीतिक ठिकानों, हवाई अड्डों और तेल ढांचागत सुविधाओं को निशाना बनाते हुए अपने हमलों को काफी तेज कर दिया है। खासतौर से, रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगातार ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से हमले किए गए हैं। 1 अक्टूबर 2026 से अब तक इस हवाई अड्डे पर 20 से अधिक हमले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें कई निर्दोष नागरिक मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।
इन हमलों में उड़ान भरने वाली मिसाइलें हवा में अपनी दिशा बदलने में सक्षम हैं, जिससे पैट्रियट जैसे पारंपरिक इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए भी इन्हें रोकना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस भीषण हवाई आक्रमण के चलते पूरे सऊदी अरब में ‘एयर रेड अलर्ट’ जारी करना पड़ा है और वैश्विक तेल बाजारों में भी अनिश्चितता के कारण हलचल मच गई है। (Saudi Arabia Houthi War)
मिस्र की ऐतिहासिक सैन्य पहल: संसद में विचार
सऊदी अरब द्वारा अपने सहयोगियों से सैन्य सहायता की अपील किए जाने के बाद, काहिरा में राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी की अध्यक्षता में मिस्र के राष्ट्रीय रक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोस्तफा मदबौली, संसद अध्यक्ष और सेना प्रमुख शामिल हुए। परिषद ने साफ तौर से कहा कि सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा, मिस्र और व्यापक अरब जगत की सुरक्षा से अटूट रूप से जुड़ी हुई है।
मिस्र के संविधान के अनुच्छेद 152 के तहत, राष्ट्रपति संसद की अनुमति के बिना विदेशों में सेना नहीं भेज सकते। इसके लिए राष्ट्रपति अल-सीसी ने मिस्र की संसद का एक आपातकालीन बंद सत्र बुलाया है, ताकि हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की रक्षा के लिए मिस्र की सशस्त्र सेनाओं को वहां तैनात करने की मंजूरी ली जा सके। इस प्रस्ताव पर दो-तिहाई बहुमत से मुहर लगाने के लिए संसदीय विचार-विमर्श जारी है। (Saudi Arabia Houthi War)
किस प्रकार की मदद करेगा मिस्र?
रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिस्र का यह कदम पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन पर आधारित होगा। मिस्र यमन के भीतर सीधे किसी जमीनी युद्ध का हिस्सा बनने के बजाय सऊदी अरब की रक्षात्मक क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। हूती ड्रोन और मिसाइलों को ट्रैक करने साथ ही उन्हें हवा में ही नष्ट करने के लिए मिस्र अपनी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों और तकनीकी विशेषज्ञों को सऊदी अरब भेज सकता है।
लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरू मध्य में समुद्री सुरक्षा बढ़ाना मिस्र की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सऊदी अरब को हूती हमलों के खतरों से पहले आगाह करने के लिए रीयल-टाइम इंटेलिजेंस साझा की जाएगी। (Saudi Arabia Houthi War)
मिस्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सहयोग?
मिस्र और सऊदी अरब पुराने रणनीतिक और आर्थिक साझेदार रहे हैं। 2013 के बाद से सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने मिस्र की अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर की सहायता और निवेश देकर संभाला है। इसके अलावा, सऊदी अरब में लाखों मिस्र के नागरिक रहते हैं और काम करते हैं, जो मिस्र के लिए विदेशी मुद्रा प्रेषण का सबसे बड़ा स्रोत हैं। हाल ही में रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक मिस्र के क्रू मेंबर की भी मौत हो गई थी।
इसके अलावा, हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजों पर किए जाने वाले हमलों से स्वेज नहर के यातायात पर बुरा असर पड़ा है। मिस्र के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों के कारण स्वेज नहर को लगभग $11 अरब डॉलर का भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है। इसलिए, हूतियों को नियंत्रित करना मिस्र के अपने आर्थिक हितों के लिए भी बेहद जरूरी है। (Saudi Arabia Houthi War)
हूती विद्रोहियों और ईरान की प्रतिक्रिया
मिस्र की इस बड़ी घोषणा के बाद यमन की राजधानी सना में हूती संचालित संसद के अध्यक्ष याह्या अल-रई ने काहिरा को चेतावनी दी है। हूतियों ने कहा है कि इस संघर्ष में मिस्र का शामिल होना उसकी खुद की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
बदल रहे हैं मध्य पूर्व के गठबंधन
सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर केवल मिस्र ही नहीं, बल्कि कई अन्य क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां भी सक्रिय हो गई हैं। हाल ही में सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ लागू किया है, जिसके तहत सऊदी अरब को सैन्य और खुफिया सहायता दी जा रही है। वहीं फ्रांस ने लाल सागर के प्रमुख तेल केंद्रों की सुरक्षा के लिए अपनी सेना और रडार सिस्टम भेजने का संकल्प लिया है, जबकि ब्रिटेन हवाई ईंधन भरने की सुविधा प्रदान कर रहा है। (Saudi Arabia Houthi War)
मिस्र का सऊदी अरब के पक्ष में मजबूती से खड़े होना यह दिखाता है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी बड़े खतरे से निपटने के लिए अरब देश अब एकजुट मोर्चा बनाने को तैयार हैं। यदि मिस्र की संसद से सेना की तैनाती को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ साबित होगा।









