Bahraich Wolf Attacks: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भेड़ियों के हमलों से दहशत फैल गई है। पिछले 15 दिनों में भेड़ियों ने चार मासूम बच्चों की जान ले ली है और 18 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग खासकर बच्चे और महिलाएं भेड़ियों के हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
सीएम ने भेड़ियों के हमलों के पीड़ितों से मुलाकात की
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बहराइच जिले में भेड़िया प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और हाल ही में हुए भेड़ियों के हमलों के पीड़ितों से मुलाकात की। राज्य सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा के रूप में वर्गीकृत किया है, तथा मृतक पीड़ितों के परिवारों को 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता तथा घायलों को सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया है। (Bahraich Wolf Attacks)
पिछले 15-20 दिनों से भेड़ियों के हमलों से उत्पन्न आतंक से निपटने के लिए, सुरक्षा बढ़ाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में 21 टास्क फोर्स और छह वन विभाग की टीमों को तैनात किया गया है।

5 लाख रुपये की सहायता की घोषणा (Bahraich Wolf Attacks)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हमारी सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा है, जिससे ऐसे प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता के दायरे में लाया जा रहा है। जिन परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है, उन्हें 5 लाख रुपये तक की सरकारी सहायता प्रदान की जा रही है।
ऐसे वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। घायलों का इलाज किया जा रहा है और उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। पिछले 15-20 दिनों से लगातार दहशत का माहौल बना हुआ है। सरकार ने पूरे इलाके में 21 टास्क फोर्स का गठन किया है। वन विभाग ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में छह टीमें गठित की हैं।”

वन विभाग की 20 से ज़्यादा टीमें तैनात
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के मझारा तौकली क्षेत्र के बाबा पटाव गांव के स्थानीय लोग जंगली जानवरों द्वारा बच्चों पर किए जा रहे हमलों के कारण अत्यधिक भय और संकट में जी रहे हैं। बुधवार शाम एक भेड़िये के हमले के बाद एक बच्ची को अस्पताल ले जाया गया और उसे मृत घोषित कर दिया गया। बहराइच ज़िले में पिछले 15 दिनों में जंगली जानवरों के अचानक हमले की कुल चार घटनाएँ सामने आई हैं।
बहराइच के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभागों की 21 टीमों के साथ वन विभाग की 20 से अधिक टीमें इस मुद्दे को सुलझाने में लगी हुई हैं। उन्होंने बताया कि यह कैसरगंज तहसील का एक गाँव है और इस गाँव में जानवरों के हमले से यह तीसरी मौत है। (Bahraich Wolf Attacks)
फ़िलहाल, वन विभाग की 20 से ज़्यादा टीमें थर्मल ड्रोन और अतिरिक्त ड्रोन के साथ काम कर रही हैं। हमने इस गाँव के लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की 21 टीमें भी तैनात की हैं। हमने गाँव वालों से अपने बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखने को कहा है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया (Bahraich Wolf Attacks)
ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर रात में पहरा दे रहे हैं। महिलाएं अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जागती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भेड़ियों को पकड़ा या खदेड़ा नहीं जाता, तब तक हालात सुधरने वाले नहीं हैं।









