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बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला, तेहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की सजा

Tarun Tejpal

Tarun Tejpal: बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उन्हें सरेंडर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने मापुसा सत्र न्यायालय (सत्र अदालत) के 2021 के बरी करने वाले फैसले को पूरी तरह पलट दिया।

Tarun Tejpal: किन धाराओं में ठहराया गया दोषी?

अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (2)(f) (विश्वास या अधिकार के पद पर मौजूद व्यक्ति द्वारा बलात्कार), 354(a) (यौन उत्पीड़न), और 354(b) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दोषी पाया। गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सख्त संदेश देने के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। वहीं, तेजपाल ने खप को राजनीतिक पीड़ित बताते हुए नरमी बरतने की गुहार लगाई थी।

2013 में गोवा के होटल की लिफ्ट में लगे थे यौन उत्पीड़न के आरोप

बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा बेंच ने 6 अगस्त 2026 को तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इससे पहले, अदालत ने पूर्व तेहलका संपादक तरुण तेजपाल को उनके जूनियर सहयोगी द्वारा दायर 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया था।

बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने 2021 में गोवा सत्र न्यायालय द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली गोवा सरकार की अपील पर यह फैसला सुनाया। यह मामला एक महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है, जिसमें उसने तेजपाल पर 7 और 8 नवंबर, 2013 को एक होटल की लिफ्ट के अंदर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। तेजपाल को इन्हीं आरोपों के तहत 30 नवंबर, 2013 को गिरफ्तार किया गया था।

शिकायत के बाद गिरफ्तारी से लेकर हाई कोर्ट के फैसले तक

29 सितंबर 2017 को, अदालत ने उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए, जिनमें बलात्कार, यौन उत्पीड़न और अवैध कारावास शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। आरोप तय होने के बाद, तेजपाल (Tarun Tejpal) ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। शीर्ष न्यायालय ने आरोपों को रद्द करने से इनकार कर दिया और निर्देश दिया कि मुकदमे की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए।

सत्र अदालत ने 2021 में किया था बरी, गोवा सरकार ने दी थी चुनौती

मई 2021 में, गोवा सत्र न्यायालय ने तेजपाल (Tarun Tejpal) को सभी आरोपों से बरी कर दिया, यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष अपने मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। निचली अदालत ने चिकित्सा साक्ष्य के अभाव को ध्यान में रखते हुए और शिकायतकर्ता और तेजपाल के बीच हुए संदेशों पर भरोसा करते हुए निष्कर्ष निकाला कि ये संदेश इस दावे का समर्थन नहीं करते कि शिकायतकर्ता कथित हमले से मानसिक रूप से आघातग्रस्त हुई थी।

इसके बाद गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में बरी किए जाने को चुनौती दी और निचली अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की। उच्च न्यायालय द्वारा मुआवजे की राशि की घोषणा से पहले पत्रकारों से बात करते हुए तेजपाल ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय से राहत की अपील करेंगे और आरोप लगाया कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे तेजपाल, राजनीतिक प्रतिशोध का लगाया आरोप

तेजपाल (Tarun Tejpal) ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, शत प्रतिशत जाएंगे। मुझे कोई शक नहीं है। 13 सालों से, तहलका के काम की वजह से राजनीतिक बदले की भावना से, वे मेरे पीछे पड़े हैं। हमने ट्रायल कोर्ट में साढ़े सात साल तक केस लड़ा और बरी हो गए। अब वे फिर से मेरे पीछे पड़े हैं। वे अपने साथ वालों को तो बरी कर देते हैं, लेकिन उनके पीछे पड़ जाते हैं जिन्होंने कभी उनके खिलाफ पत्रकारिता की हो या उनके खिलाफ कुछ कहा हो। आप पत्रकार हैं, जाकर देखिए कि पिछले 12 सालों में उन्होंने कितने लोगों को झूठे केसों में फंसाया है। उन्होंने मुझे भी फंसाया था, लेकिन फिर भी मैं बरी हो गया।

तेजपाल का दावा- पत्रकारिता की वजह से बनाया गया निशाना

इसके बावजूद, अब पत्रकारों पर निर्भर करता है कि वे जाकर सवाल पूछें। आप जानते हैं उमर खालिद 6 साल से जेल में हैं। आप जानते हैं शरजील इमाम भी जेल में हैं, आप जानते हैं सुरेंद्र गडलिंग अलग-अलग मामलों में जेल में हैं। भाई, सिर्फ वे ही नहीं हैं, दर्जनों लोग हैं। मैं भी उनमें से एक हूं। यह सच है कि तहलका ने पत्रकारिता की और कुछ ऐसी पत्रकारिता भी की जिससे निहित स्वार्थों, राजनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा। क्योंकि बदले की भावना से वे 13 सालों से हमारे पीछे पड़े हैं। उन्होंने मेरी पत्रकारिता बंद करवा दी, उन्होंने तहलका अखबार बंद करवा दिया, उन्होंने मेरी किताबों की छपाई रोक दी। लेकिन हम लड़ेंगे, मुझे पूरा विश्वास है कि इतनी बड़ी न्यायपालिका में ऐसे न्यायाधीश हैं जो सच्चाई को देखेंगे और सच्चाई स्पष्ट रूप से सामने आएगी। (Tarun Tejpal)

यह एक बार निचली अदालत में सामने आ चुकी है, जिसने डेढ़ साल तक लगातार मेरा मुकदमा चलाया क्योंकि यह दिन-प्रतिदिन सुनवाई का आदेश था। और इतना सबूत है, अगर आप लोग मुझसे बात करना बंद करके अदालत में सबूत देखने जाएं, तो इतने सबूत हैं कि मुझे एक बार नहीं बल्कि दस बार बरी किया जाना चाहिए। हम वह सबूत जनता के सामने लाएंगे, कोई दिक्कत नहीं है।”

पूर्व जांच अधिकारी सुनीता सावंत ने हाई कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

इस बीच, गोवा पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी और तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व जांच अधिकारी सुनीता सावंत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। सावंत ने कहा कि निचली अदालत सबूतों का सही आकलन करने में विफल रही और उच्च न्यायालय ने बरी करने के फैसले को रद्द करके सही निर्णय लिया। अदालत के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए सावंत ने कहा कि राज्य ने बरी करने के फैसले को चुनौती दी थी क्योंकि उसका मानना था कि निचली अदालत का आदेश “गलत” था।

उन्होंने कहा, “हमने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहले ही चुनौती दे दी थी क्योंकि यह निश्चित रूप से एक अनुचित आदेश था… जांच की सामान्य प्रक्रिया के दौरान जो कुछ भी सामने आया, उसे अदालत के सामने पेश किया गया। ट्रायल कोर्ट सबूतों को समझने में कहीं न कहीं चूक कर बैठा। इस मामले पर हाई कोर्ट में बहस हुई, जिसने ट्रायल कोर्ट के आदेश में खामियों की जांच की और इसके बाद बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया।”


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Author: Vaishali

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